YouTubers, Creators और Freelancers को भरना होगा EDF Form! जानें क्या है नया Rule


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Oct 08, 2026


ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ काम करने वाले भारतीयों के लिए जरूरी खबर है। हाल ही में, RBI ने सर्विस एक्सपोर्ट के नियमों में बदलाव किया है। अब ऐसे कुछ सर्विस एक्सपोर्टर्स को अपनी एक्सपोर्ट वैल्यू घोषित करनी होगी। इसके लिए ‘एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म’ (EDF) जमा करना होगा। नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। इसका असर उन बिजनेस और प्रोफेशनल्स पर होगा, जिन्हें पहले यह फॉर्म नहीं भरना पड़ता था।

किन लोगों को भरना होगा फॉर्म? 

नए नियम का असर कई तरह के सर्विस प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। इनमें फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, डिजाइनर और डेवलपर शामिल हैं। कंटेंट और मार्केटिंग एजेंसियां भी इसके दायरे में आ सकती हैं। इसके अलावा BPO, KPO, ऑनलाइन एजुकेटर और वीडियो-एनिमेशन स्टूडियो भी प्रभावित हो सकते हैं।

Upwork, Fiverr और Toptal जैसे प्लेटफॉर्म से काम करने वालों को भी इस नियम पर ध्यान देना होगा। खासकर तब, जब उनकी सर्विस ‘सर्विस एक्सपोर्ट’ कैटेगरी में आती हो।

क्या है EDF?

EDF यानी ‘एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म’ एक फॉर्मल डिक्लेरेशन है। इस फॉर्म में एक्सपोर्ट की टोटल वैल्यू बतानी होती है।

सर्विस एक्सपोर्ट करने वालों को यह फॉर्म अपने ‘ऑथराइज्ड डीलर बैंक’ के जरिए जमा करना होता है। यही बैंक आमतौर पर विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन संभालता है।

इसके बाद दी गई जानकारी RBI के ‘एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ में दर्ज की जाएगी।

EDF कब भरना होगा?

EDF भरने की डेडलाइन भी निर्धारित कि गई है। आम तौर पर इसे सर्विस इनवॉइस जारी होने के 30 दिनों के अंदर यह जमा करना होता है। उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2026 में जारी इनवॉइस का EDF आम तौर पर 30 नवंबर तक जमा करना होगा।

एक ही महीने में जारी कई इनवॉइस के लिए एक ही EDF भरा जा सकता है। हर इनवॉइस के लिए अलग फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी।

सॉफ्टवेयर सर्विस को छोड़कर अन्य सर्विसेज में पेमेंट मिलने से पहले या उसी दिन भी EDF जमा किया जा सकता है। देरी की सही वजह होने पर बैंक अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं।

फ्रीलांसरों की बढ़ सकती है परेशानी 

नए नियम से फ्रीलांसर और छोटे बिजनेस की चिंता बढ़ सकती है। सबसे बड़ी वजह अतिरिक्त कागजी काम है।

कई बड़ी कंपनियों के पास इसके लिए अलग टीमें होती हैं। लेकिन छोटे बिजनेस और फ्रीलांसरों को खुद बैंक से बातचीत करनी पड़ सकती है। इसके अलावा,  विदेशी इनवॉइस से जुड़े एडिशनल डाक्यूमेंट्स भी संभालने होंगे।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे छोटे बिजनेस पर अतिरिक्त कागजी काम बढ़ सकता है। क्योंकि वे पहले से ही GST, इनकम टैक्स और बैंक से जुड़े कई काम संभाल रहे हैं।

क्या सिर्फ US डॉलर पेमेंट पर लागू है नियम?

ऐसा नहीं है। यह नियम सिर्फ US डॉलर में मिलने वाले पेमेंट तक सीमित नहीं है। यह किसी भी फॉरेन करेंसी में होने वाले एलिजिबल एक्सपोर्टसर्विस पर लागू हो सकता है। यहां करेंसी से ज्यादा जरूरी है कि ट्रांजैक्शन ‘सर्विस एक्सपोर्ट’ के दायरे में आता हो।


सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ा बदलाव

सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वालों के लिए भी रिपोर्टिंग नियम बदले हैं। नए फ्रेमवर्क में पुराने SOFTEX सिस्टम को शामिल कर दिया गया है। अब सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट भी EDF के तहत रिपोर्ट किया जाएगा।

RBI के मुताबिक, नए सिस्टम से एक्सपोर्ट ट्रांजैक्शन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। इससे एक्सपोर्ट से मिलने वाली इनकम की निगरानी भी आसान होगी। साथ ही, इससे एक्सपोर्ट से मिलने वाला रेवेन्यू समय पर भारत वापस लाने में मदद मिलेगी।

60-Words Summary:

RBI ने सर्विस एक्सपोर्ट के नियमों में बदलाव किया है। 1 अक्टूबर 2026 से कुछ सर्विस एक्सपोर्टर्स को EDF जमा करना होगा। इसमें एक्सपोर्ट की पूरी वैल्यू बतानी होगी। इसका असर फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, एजेंसियों और अन्य प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट भी नए EDF फ्रेमवर्क में आएगा। इससे रिपोर्टिंग और एक्सपोर्ट पेमेंट की निगरानी आसान होगी।


Bhawna Mishra
Bhawna Mishra
  • 758 Posts

She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

Subscribe Now!

Get latest news and views related to startups, tech and business

You Might Also Like

Recent Posts

Related Videos

   

Subscribe Now!

Get latest news and views related to startups, tech and business

who's online