WhatsApp Business के चार्जिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दरअसल, कंपनी 1 अक्टूबर से अपने बिजनेस प्लेटफॉर्म पर नया ‘पर मैसेज’ (per-message) प्राइसिंग सिस्टम लागू करने जा रही है। इसका असर उन बिजनेस पर पड़ेगा। जो WhatsApp Business प्लेटफॉर्म और API के जरिए बड़ी संख्या में अपनी ऑडियंस को मैसेज भेजते हैं।
नए सिस्टम के तहत कंपनियों से चैट कैटेगरी के हिसाब से नहीं, बल्कि हर टेम्प्लेट मैसेज के लिए अलग चार्ज लिया जाएगा। यानी बिजनेस जितने ज़्यादा मैसेज शेयर करेंगे। व्हाट्सऐप पर उनका एक्सपेंस भी उतना ही बढ़ सकता है।

हर टेम्प्लेट मैसेज पर लगेगा चार्ज
नए सिस्टम में WhatsApp पर मैसेज भेजने के लिए बिजनेस को कुछ खास टेम्पलेट मैसेज पर पेमेंट करना होगा। इनका इस्तेमाल नोटिफिकेशन, मार्केटिंग कैंपेन, रिमाइंडर और ऑर्डर अपडेट जैसी जानकारी भेजने के लिए किया जाता है।
हालांकि, हर मैसेज का चार्ज एक जैसा नहीं होगा। यह मैसेज की कैटेगरी और यूजर के देश के हिसाब से तय होगा। यानी एक ही मैसेज के लिए अलग-अलग देशों में अलग चार्ज लग सकता है।
इसका असर खास तौर पर उन बिजनेस पर पड़ेगा। जो बड़ी संख्या में WhatsApp पर यूजर्स से कनक्टेड रहते हैं। ऐसे में नए सिस्टम के बाद उनके कैंपेन का बजट भी बढ़ सकता है।
मार्केटिंग मैसेज पर आखिर क्यों लगेगा ज्यादा चार्ज?
बता दें कि WhatsApp पर बिजनेस के हर मैसेज की कीमत अब एक जैसी नहीं होगी। आप किस तरह का मैसेज भेज रहे हैं। इसी के आधार पर उसका चार्ज तय होगा।
इनमें सबसे ज्यादा असर मार्केटिंग मैसेज पर पड़ सकता है। प्रमोशन, ऑफर और ऐड वाले मैसेज का चार्ज आम तौर पर ज्यादा होता है। वहीं, ऑर्डर कन्फर्मेशन, अकाउंट अपडेट और दूसरे जरूरी नोटिफिकेशन यूटिलिटी मैसेज में आते हैं।
वेरिफिकेशन और लॉगिन से जुड़े मैसेज के लिए अलग ऑथेंटिकेशन कैटेगरी है। ऐसे में इसका चार्ज भी अलग तरीके से तय होगा।
हर WhatsApp Chat पर नहीं लगेगा चार्ज
बताते चलें कि नए प्राइसिंग सिस्टम के बाद भी हर चैट पर चार्ज नहीं लगेगा। कुछ मामलों में बिजनेस ग्राहकों को बिना एडिशनल चार्जेज के रिप्लाई कर सकेंगे।
अगर चैट यूजर की तरफ से शुरू होती है, तो ‘कस्टमर सर्विस विंडो’ के दौरान कुछ मैसेज बिल्कुल फ्री रहेंगे। इसके अलावा, कुछ खास सर्विस और एंट्री पॉइंट से आने वाले मैसेज पर भी चार्ज नहीं लगेगा।
इसलिए बिज़नेस का खर्च सिर्फ मैसेज वॉल्यूम पर डिपेंड नहीं करेगा। चैट किसने शुरू की और किस तरह का मैसेज भेजा गया। इन फैक्टर्स के आधार पर भी चार्ज तय होगा।
नए प्राइसिंग मॉडल के पीछे Meta की क्या है स्ट्रेटेजी?
WhatsApp अब सिर्फ मैसेज भेजने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है। मेटा इसे बिजनेस और क्लाइंट्स के बीच जुड़ने का बड़ा जरिया बनाना चाहती है। आज लाखों बिज़नेस ओनर्स व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं। कंपनी ने भी इस प्लेटफॉर्म पर ऐड, कस्टमर सपोर्ट, पेमेंट और ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े कई टूल जोड़े हैं।
ऐसे में नया ‘पर-मैसेज’ मॉडल मेटा के लिए रेवेन्यू जनरेशन का एक और जरिया बनेगा।
WhatsApp के नए चार्ज से बदल सकता है बजट
WhatsApp की नई प्राइसिंग का असर भारत में कई बिजनेस पर पड़ सकता है। ई-कॉमर्स, बैंकिंग, ट्रैवल, एजुकेशन और रेस्टोरेंट जैसे सेक्टर में WhatsApp का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होता है। यहां तक कि MSME भी अपने कस्टमर्स से जुड़ने के लिए इसका सहारा लेते हैं।
जो कंपनियां बड़ी संख्या में प्रमोशनल या ट्रांजैक्शनल मैसेज भेजती हैं। उनके लिए यह अपडेट ज्यादा अहम होगा। खास तौर पर मार्केटिंग कैंपेन चलाने वाले बिजनेस के बजट में बढ़ोतरी हो सकती है।
ऐसे में बिजनेस को अपने मैसेजिंग प्लान में बदलाव करना पड़ सकता है। ऑटोमेटेड कैंपेन, नोटिफिकेशन की फ्रीक्वेंसी और कस्टमर एंगेजमेंट जैसे सेगमेंट्स पर दोबारा विचार करना होगा।
रेगुलर WhatsApp Chat पर नहीं पड़ेगा असर
नई प्राइसिंग का असर आम WhatsApp यूजर्स पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव उन बिजनेस के लिए है। जो WhatsApp Business प्लेटफॉर्म और API का इस्तेमाल करते हैं।
जो लोग रेगुलर WhatsApp ऐप पर फ्रेंड्स, फैमिली या किसी बिजनेस से चैट करते हैं। उन्हें मैसेज भेजने के लिए कोई नया चार्ज नहीं देना होगा। यानी यह अपडेट मुख्य रूप से बिजनेस के लिए है। आम यूजर्स की रेगुलर WhatsApp चैट पर इसका असर नहीं होगा।
60-Words Summary:
WhatsApp Business की प्राइसिंग में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अक्टूबर से नया प्रति-मैसेज मॉडल लागू होगा। अब बिजनेस को कुछ टेम्प्लेट मैसेज के लिए अलग से चार्ज देना होगा। यह चार्ज मैसेज की कैटेगरी और देश के हिसाब से तय होगा। मार्केटिंग मैसेज पर खर्च ज्यादा हो सकता है। मैसेजिंग कैंपेन चलाने वाले बिजनेस के लिए यह बदलाव अहम होगा। आम यूजर्स की पर्सनल WhatsApp चैट पर कोई नया चार्ज नहीं लगेगा।
