भारत के सरकारी सेक्टर में काम करने वाले 36 साल के एक व्यक्ति का अनुभव बेहद निराशाजनक रहा है। उन्हें सिर्फ 20 सेकंड के भीतर US टूरिस्ट वीज़ा देने से इनकार कर दिया गया। उनका कहना है कि यह सिर्फ़ वीज़ा रिजेक्ट होने की बात नहीं थी। बल्कि उनके लिए बेहद अपमानजनक अनुभव था। इंटरव्यू कुछ सेकंड्स में ही खत्म हो गया। न कोई बातचीत हुई। न ही रिजेक्शन की वजह बताई गई।
हाल ही में उन्होंने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। जिसके बाद से US वीज़ा इंटरव्यू की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

महज 20 सेकंड में हुआ इंटरव्यू
दरअसल आवेदक US टूरिस्ट वीज़ा इंटरव्यू के लिए पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था। उसे उम्मीद थी कि वह अपनी ट्रैवल प्लानिंग और प्रोफेशनल बैकग्राउंड के बारे में बता सकेगा। लेकिन इंटरव्यू सिर्फ 20 सेकंड चला। इसके बाद वीज़ा ऑफिसर ने उसे एप्लीकेशन रिजेक्ट होने की जानकारी दे दी।
कैंडिडेट के मुताबिक, फैसला इतनी जल्दी लिया गया कि उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। इस अनुभव के बाद उसने कहा कि अब वह दोबारा US वीज़ा के लिए आवेदन नहीं करेगा।
स्ट्रांग प्रोफ़ाइल के बाद भी वीज़ा रिजेक्ट
इस अनुभव ने एक अहम सवाल खड़ा किया है। क्या सरकारी नौकरी, अच्छी आय और मजबूत प्रोफ़ाइल से US टूरिस्ट वीज़ा मिलना आसान हो जाता है? कई भारतीय आवेदकों को लगता है कि मजबूत प्रोफ़ाइल से वीज़ा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि, US विज़िटर वीज़ा का फैसला सिर्फ नौकरी या कमाई देखकर नहीं होता। काउंसलर ऑफिसर देखते हैं कि आवेदक वीज़ा की जरूरी शर्तें पूरी करता है या नहीं।
साथ ही, एप्लिकेंट को यह भरोसा भी दिलाना होता है कि वह तय वीज़ा कैटेगरी के लिए एलिजिबल है। इसलिए अच्छी नौकरी और मजबूत आर्थिक स्थिति होने के बावजूद वीज़ा की मंज़ूरी तय नहीं होती।
क्यों रिजेक्ट हो सकता है US वीजा?
अमेरिकी टूरिस्ट वीज़ा कई कारणों से खारिज हो सकता है। इनमें सबसे आम वजहों में से एक सेक्शन 214B है। यह तब लागू हो सकती है, जब आवेदक यह साबित नहीं कर पाता कि वह नॉन-माइग्रेंट वीजा के लिए योग्य है।
इसके अलावा, एप्लिकेंट को यह भी भरोसा दिलाना होता है कि उसका अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का इरादा नहीं है। अगर काउंसलर ऑफिसर इससे संतुष्ट नहीं होता, तो वीज़ा आवेदन रिजेक्ट किया जा सकता है।
US वीज़ा रिजेक्शन के पीछे ये भी हो सकते हैं कारण
वीज़ा रिजेक्शन के पीछे कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। पिछले इमिग्रेशन उल्लंघन इसका एक प्रमुख कारण है। वही अधूरी जानकारी या आवेदन में कोई गड़बड़ी भी असर डाल सकती है। कैंडिडेट की परिस्थितियों को लेकर किसी तरह की चिंता होने पर भी फैसला प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक,काउंसलर ऑफिसर उपलब्ध जानकारी के आधार पर वीज़ा आवेदन पर फैसला लेते हैं।
कनाडा वीज़ा रिजेक्शन से US वीज़ा पर असर?
इस घटना के बाद एक सवाल फिर चर्चा में है। क्या कनाडा का वीज़ा रिजेक्ट होने से US वीज़ा आवेदन पर भी असर पड़ता है? ऐसा कोई सीधा नियम नहीं है। कनाडा का वीज़ा रिजेक्ट होना अपने आप में US वीज़ा रिजेक्शन की वजह नहीं बनता।
हालांकि, आवेदनकर्ता को अपने इमिग्रेशन और ट्रैवल हिस्ट्री की सही जानकारी देनी होती है। इस इनफार्मेशन में किसी तरह की गलती या विरोधाभास सवाल खड़े कर सकता है।
किसी दूसरे देश का वीज़ा रिजेक्शन भी रिलेवेंट हो सकता है। खासकर तब, जब उससे व्यक्ति की स्थिति या US वीज़ा आवेदन में दी गई जानकारी पर भरोसा करना मुश्किल हो।
US वीज़ा मिलना एंट्री की गारंटी नहीं
US वीज़ा मिलने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में एंट्री तय है। वीज़ा मिलने के बाद भी पैसेंजर्स को इमिग्रेशन नियमों का पालन करना होता है। अमेरिकी लॉ के मुताबिक, कई कारणों से एप्लीकेशन को रिजेक्ट किया जा सकता है। ऐसा तब हो सकता है, जब कोई अपनी योग्यता साबित न कर पाए। इस कानून के तहत किसी जानकारी को लेकर चिंता होने पर भी आवेदन रिजेक्ट किया जा सकता है।
रिजेक्शन के बाद दोबारा कैसे करें आवेदन?
US वीज़ा आवेदन रिजेक्ट होने के बाद दोबारा अप्लाई किया जा सकता है। इसके लिए न्यू एप्लीकेशन जमा करना होता है। साथ ही, वीज़ा फीस भी दोबारा देनी पड़ती है। हालांकि, दोबारा आवेदन तभी फायदेमंद है। जब परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव हुआ हो। अगर पहले रिजेक्शन की वजह स्पष्ट हो गई हो। तो दोबारा आवेदन किया जा सकता है।
भारतीय आवेदकों में बढ़ रही निराशा
बता दें कि यह घटना अकेली नहीं है। कई भारतीय प्रोफेशनल्स और पैसेंजर्स ने US वीज़ा इंटरव्यू को लेकर अपने एक्सपीरियंस शेयर किए हैं। कुछ ने इंटरव्यू को बेहद मुश्किल बताया है।
ऐसा अनुभव तब और निराशाजनक हो सकता है, जब आवेदक के पास परमानेंट जॉब या यात्रा की स्पष्ट योजना हो। इसके बावजूद वीज़ा रिजेक्ट होने पर निराशा बढ़ सकती है।
PSU कर्मचारी का दोबारा अप्लाई न करने का फैसला भी इसी निराशा को दिखाता है। यह बताता है कि वीज़ा रिजेक्शन का भावनात्मक असर कितना गहरा हो सकता है। भले ही यह इमिग्रेशन प्रक्रिया का एक सामान्य फैसला हो।
