वर्क फ्रॉम होम की निगरानी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अरबपति वकील जॉन मॉर्गन की कंपनी की वर्कप्लेस पॉलिसी ने प्राइवेसी और प्रोडक्टिविटी को लेकर बहस छेड़ दी है। इस नई पॉलिसी के तहत घर से काम करने वाले कर्मचारियों को हर वक्त कैमरे पर रहना होगा।

WFH कर्मचारियों की कैमरा मॉनिटरिंग शुरू
घर से काम करने वालों पर अब कैमरों से नज़र रखी जाएगी। मॉर्गन एंड मॉर्गन के फाउंडर मॉर्गन ने कहा कि जो लोग ऑफिस नहीं आना चाहते थे, वे घर से काम तो कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कड़ी निगरानी में रहना होगा।
इसके तहत, कंपनी ने WFH डिवाइस पर कैमरा मॉनिटरिंग और कीस्ट्रोक ट्रैकिंग शुरू की है। मॉर्गन के मुताबिक, इसका मकसद कर्मचारियों की एक्टिविटी पर नज़र रखना और ज़िम्मेदारी तय करना था। उनका दावा है कि पॉलिसी लागू होने के पहले हफ्ते में ही 23 कर्मचारियों ने रिजाइन दे दिया।
23 इस्तीफों के बाद बॉस ने बताई वजह
मॉर्गन के मुताबिक, कर्मचारियों ने रिमोट वर्किंग का विरोध नहीं किया। वे सिर्फ काम के दौरान ज्यादा निगरानी के पक्ष में नहीं थे। दरअसल, उनका कहना था कि घर से काम करने वाले कर्मचारियों को भी अपने टास्क की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
हालांकि, इस बात का कोई प्रूफ नहीं है कि नौकरी छोड़ने वाले तेईस लोग काम में पीछे थे। उनके इस्तीफे के पीछे असल वजह क्या थी। इस बारे में अभी तक कोई साफ बात सामने नहीं आई है।
WFH में प्राइवेसी को लेकर बढ़ी चिंता
दरअसल एम्प्लॉयीज वर्कओवर्स ज्यादा निगरानी के पक्ष में नहीं थे। इसी वजह से इस पॉलिसी को लेकर प्राइवेसी के सवाल भी उठ रहे हैं।
क्रिटिक्स का कहना है कि घर में कैमरे से नजर रखने पर, इंसान का अपना घर भी मॉनिटरिंग स्पेस बन जाता है। उनका तर्क है कि रिमोट एम्प्लॉइज का इवैल्यूएशन उनके टारगेट, डेडलाइन और परफॉर्मेंस से किया जा सकता है। इसके लिए पूरे समय लैपटॉप का कैमरा ऑन रखना जरूरी नहीं है।
इस मामले में, यह फर्क समझना जरूरी है। वर्क रिजल्ट्स का ध्यान रखना और पूरे दिन एम्प्लॉइज को मॉनिटर करना दो अलग बातें हैं।
क्या मॉनिटरिंग से बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी?
रिमोट और हाइब्रिड वर्क के बढ़ते ट्रेंड के बीच कंपनियों के सामने अब एक सवाल खड़ा हो रहा है। क्या ज्यादा मॉनिटरिंग से कर्मचारियों का काम बेहतर होता है?
कैमरे से मैनेजर को कर्मचारियों के काम की ज्यादा जानकारी मिल सकती है। लेकिन इससे उनमें यह भावना भी आ सकती है कि कंपनी को उन पर भरोसा नहीं है।
खासकर नॉलेज वर्क में प्रोडक्टिविटी इवैल्यूएट करना आसान नहीं है। सिर्फ कीस्ट्रोक या स्क्रीन एक्टिविटी से काम का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। रिसर्च, मीटिंग और क्रिएटिव वर्क में कई घंटे ऐसे भी हो सकते हैं। जब स्क्रीन पर ज्यादा एक्टिविटी नजर न आए। इसके बावजूद काम जारी रहता है।
WFH के साथ बदल रही वर्कप्लेस पॉलिसी
कई कंपनियां अब रिमोट वर्क को अपने वर्क कल्चर का हिस्सा बना रही हैं। ऐसे में एम्प्लॉयर्स प्रोडक्टिविटी मॉनिटरिंग के नए तरीके आजमा रहे हैं। इनमें कर्मचारियों की एक्टिविटी मॉनिटर करने वाले सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं।
कंपनियों के लिए जरूरी है कि काम भी सही तरीके से हो और कर्मचारियों को पूरी आजादी भी मिले। इसके लिए उनके टारगेट सेट किए जा सकते हैं। परफॉरमेंस देखी जा सकती है। वही जरूरत पड़ने पर एम्प्लॉयीज से बात की जा सकती है। हर समय कैमरे से नजर रखना जरूरी नहीं है।
मॉर्गन की कंपनी का मामला बताता है कि ऐसी पॉलिसी जल्दी एक बड़े मुद्दे का रूप ले सकती है। रिमोट वर्क बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनियों को काम के साथ कर्मचारियों के भरोसे और प्राइवेसी का भी ध्यान रखना होगा।
