साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने एक बड़े स्कैम का खुलासा किया है। इनकम टैक्स फाइल करने के सीजन में साइबर हैकर्स एक्टिव हो गए हैं। ये लोग खासतौर पर इंडियन टैक्सपेयर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कॉर्पोरेट फाइनेंस टीम को टारगेट कर रहे रहे हैं।
सबसे पहले हैकर्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नाम से फर्जी ईमेल और डॉक्यूमेंट भेज रहे हैं। ये पूरी तरह ऑफिशियल लगते हैं। जैसे ही विक्टिम इन पर क्लिक करते हैं, फोन या कंप्यूटर में खतरनाक मैलवेयर डाउनलोड हो जाता है। इससे हमलावरों को डिवाइस का पूरा कंट्रोल मिल जाता है।

ऐसे फैलाया जाता है यह साइबर स्कैम
साइबर अपराधी पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नाम से ईमेल और मैसेज भेजते हैं। इनमें टैक्स नोटिस, पेनल्टी या नियमों के पालन से जुड़ी चेतावनी दी जाती है। साथ ही, वाब देने का प्रेशर बनाकर लोगों को जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर किया जाता है।
यहीं से पूरा जाल शुरू होता है। लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करते ही यूजर एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है। वहां से टैक्स डॉक्यूमेंट जैसी दिखने वाली ZIP या दूसरी फाइल डाउनलोड हो जाती है। फाइल खुलते ही मैलवेयर चुपचाप सिस्टम में इंस्टॉल हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती।
मैलवेयर से हैकर्स को मिलता है रिमोट एक्सेस
CloudSEK के रिसर्चर्स के अनुसार, इस साइबर कैंपेन में इस्तेमाल किया गया मैलवेयर ‘रिमोट एक्सेस ट्रोजन’ (RAT) है। सिस्टम इन्फेक्ट होने के बाद हैकर्स ये काम कर सकते हैं-
• स्क्रीनशॉट कैप्चर करना
• फाइलें अपलोड और डाउनलोड करना
• यूजर के पासवर्ड और लॉगिन क्रेडेंशियल्स चुराना
• यूजर की ऑनलाइन और सिस्टम एक्टिविटी पर नजर रखना
• लंबे समय तक इन्फेक्टेड कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस बनाए रखना
• बैंकिंग, फाइनेंशियल और टैक्स से जुड़े डॉक्युमेंट्स तक पहुंच बनाना
• कीबोर्ड पर टाइप होने वाली हर एक्टिविटी (कीस्ट्रोक्स) रिकॉर्ड करना
रिसर्चर्स का कहना है कि यह मैलवेयर सिक्योरिटी टूल्स से बचने के लिए DLL हाइजैकिंग जैसी एडवांस्ड तकनीकों का सहारा लेता है। इसी वजह से कई बार सिक्योरिटी टूल्स ka इसे आसानी से पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
किसे बनाया जा रहा है निशाना?
यह साइबर कैंपेन मुख्य रूप से उन ऑर्गेनाइजेशन और लोगों को टारगेट कर रहा है। जो टैक्स और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े हैं। जैसे-
व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स (करदाता)
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA)
टैक्स कंसल्टेंट्स
कॉर्पोरेट फाइनेंस डिपार्टमेंट्स
टैक्स कंप्लायंस से जुड़े काम करने वाले बिजनेस
रिसर्चर्स के अनुसार, साइबर अटैकर्स टैक्स फाइलिंग सीजन का फायदा उठा रहे हैं। इस अवधि में लोग इनकम टैक्स नोटिस, रिटर्न अपडेट या कंप्लायंस से जुड़े ईमेल को अधिक गंभीरता से लेते हैं। जिससे फर्जी ईमेल और मैलवेयर लिंक के जरिए उन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।
सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये उपाय
1. बिना मांगे आए ईमेल में मौजूद टैक्स से जुड़े अटैचमेंट को खोलने से बचें।
2. ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बजाय, किसी भी टैक्स नोटिस या अपडेट की पुष्टि सीधे ऑफिशियल इनकम टैक्स पोर्टल से करें।
3. किसी भी जवाब या कार्रवाई से पहले भेजने वाले के ईमेल एड्रेस की अच्छी तरह चेक करें।
4. एंटीवायरस सॉफ्टवेयर को हमेशा एक्टिव रखें और उसे समय-समय पर अपडेट करते रहें।
5. अनजान या सस्पीशियस वेबसाइटों से फ़ाइल डाउनलोड न करें।
6. विंडोज और अन्य सॉफ्टवेयर को लेटेस्ट सिक्योरिटी पैच के साथ अपडेट रखें।
7. टैक्स से जुड़े किसी भी संदिग्ध ईमेल, मैसेज या कम्युनिकेशन पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
टैक्स सीजन में बढ़ा साइबर खतरा
टैक्स फाइलिंग का समय साइबर अपराधियों के लिए आसान मौका बन जाता है। इस समय लोग टैक्स से जुड़े जरूरी कामों में व्यस्त रहते हैं। जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं और यूजर्स को फर्जी मैसेज और ईमेल भेजते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि साइबर अपराधी अब ज्यादा एडवांस फिशिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी फेक ईमेल और वेबसाइटें कई बार सरकारी नोटिस जैसी दिखाई देती हैं। इन्हीं साइबर क्राइम से बचने के लिए यूजर की सतर्कता सबसे जरूरी है।
