Marriage Registration के बावजूद शादी नहीं होगी वैध! Gujarat High Court का बड़ा फैसला


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Jul 28, 2026


गुजरात हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शादी का रजिस्ट्रेशन किसी मैरिज को वैलिड नहीं बनाता। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तय धार्मिक रस्मों का पूरा होना भी जरूरी है। यह टिप्पणी एक विवाद की सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने मामले में रजिस्टर्ड शादी को अमान्य करार देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक हिंदू विवाह नहीं हुआ था।

फैसले में कोर्ट ने साफ किया कि शादी का रजिस्ट्रेशन ही पर्याप्त नहीं है। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना भी अनिवार्य है।

शादी के दावे पर उठे गंभीर सवाल

दरअसल यह पूरा मामला एक व्यक्ति की याचिका से जुड़ा था। व्यक्ति ने दावा किया कि शादी के डॉक्युमेंट्स पर उसके हस्ताक्षर उसकी सहमति के बिना लिए गए थे। उसका कहना था कि उस समय वह अपनी पत्नी के पिता की कंपनी में काम कर रहा था। उसने यह भी बताया कि वह ब्रिटेन में रह रहा था। उसने कभी शादी की किसी रस्म में हिस्सा नहीं लिया। साथ ही, वह उस महिला के साथ पति-पत्नी की तरह कभी नहीं रहा।

हालांकि, फैमिली कोर्ट ने पहले उसकी पिटीशन खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने गुजरात हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

रस्मों के बिना शादी मान्य नहीं: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने शादी की रस्मों के महत्व पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 के तहत शादी का होना तय रीति-रिवाजों के अनुसार जरूरी है। यह रस्में विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए अहम हैं। इनमें से किसी एक पक्ष की मान्यता वाले रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न होना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि अगर विवाह की रस्मों में सप्तपदी शामिल है, तो सातवां फेरा पूरा होने के बाद ही शादी कानूनी रूप से पूरी मानी जाएगी। आम भाषा में सप्तपदी का मतलब पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेना है। 

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत जरूरी रस्में पूरी करना अनिवार्य है। सिर्फ रजिस्ट्रेशन से शादी वैध नहीं बनती।

मैरिज सर्टिफिकेट पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

इस केस में महिला ने खुद कोर्ट में माना था कि कोई हिंदू रीति-रिवाज या रस्में नहीं हुई थीं।

इस बात को मानते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट से शादी को वैलिडिटी नहीं मिल सकती। 

इसके लिए शादी का कानून के अनुसार होना जरूरी है। कोर्ट ने बताया कि रजिस्ट्रेशन केवल पहले से हुई कानूनी शादी का रिकॉर्ड होता है। यह ऐसी शादी को मान्यता नहीं दे सकता, जो कानून के तहत हुई ही नहीं है।

कोर्ट ने शादी को माना अमान्य

इस मामले में हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कथित शादी को शुरू से ही अमान्य करार दिया। साथ ही, पति को शादी के रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट को रद्द कराने के लिए अधिकारी के पास जाने की अनुमति दी। 

कोर्ट ने कहा कि जब दोनों पक्ष मान चुके हैं कि वैध हिंदू विवाह हुआ ही नहीं था। तो इस मामले में आगे लंबी सुनवाई की जरूरत नहीं है।

हाई कोर्ट का फैसला क्यों अहम है?

यह फैसला शादी के रजिस्ट्रेशन और विवाह की रस्मों के बीच अंतर को साफ करता है। कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लेकिन यह शादी की जरूरी रस्मों की जगह नहीं ले सकता। 

हिंदू कानून के तहत शादी को मान्यता देने के लिए तय रीति-रिवाजों का पालन करना भी जरूरी है।

इस फैसले का असर आगे भी देखने को मिल सकता है। शादी की वैधता से जुड़े मामलों में कोर्ट इस फैसले का हवाला दे सकते हैं।

60-Words Summary:

गुजरात हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मैरिज रजिस्ट्रेशन से शादी वैध नहीं मानी जाएगी। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तय धार्मिक रस्मों का पूरा होना भी जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने एक रजिस्टर्ड शादी को अमान्य करार दिया। यह फैसला हिंदू विवाह से जुड़े कानूनी नियमों को और स्पष्ट करता है।


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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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