श्रीनगर के एक कंज्यूमर कमीशन ने स्मार्टफोन मैन्युफैक्टरिंग कंपनी Motorola पर बड़ा एक्शन लिया है। अदालत ने कंपनी को एक फोन की पूरी कीमत वापस करने और ₹52,000 का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। दरअसल, सामान्य इस्तेमाल के दौरान ही मोटोरोला का यह फोन पानी से खराब हो गया था। जबकि कंपनी ने अपने ऐड में इसके ‘अंडरवॉटर प्रोटेक्शन’ फीचर का दावा किया था।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि कंपनी के विज्ञापनों ने ग्राहकों को गुमराह किया। कोर्ट ने इसे अअनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का स्पष्ट मामला माना है।

पानी में टेस्ट करते ही खराब हुआ फोन
पिटीशनर ने साल 2023 में Motorola Edge 40 खरीदा था। कंपनी ने इसके ऐड में IP68 अंडरवॉटर प्रोटेक्शन फीचर का दावा किया था। डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करने के कारण, उन्हें एक वॉटरप्रूफ चाहिए था। जो बारिश और गीले मौसम में भी ठीक से काम कर सके।
इसी भरोसे पर उन्होंने कंपनी के बताए तरीके से फोन को पानी में टेस्ट किया। लेकिन कुछ ही देर बाद फोन में खराबी आ गई। टेस्ट करते ही पता चला कि लिक्विड डैमेज के कारण फोन पूरी तरह खराब हो गया।
कंपनी ने वारंटी देने से किया इनकार
फोन में खराबी आने के बाद तुरंत बाद ग्राहक ने Motorola से संपर्क किया। कंपनी ने उन्हें अपने ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर भेजा। टेस्टिंग के बाद सर्विस सेंटर ने बताया कि फोन में पानी से नुकसान हुआ है। इसलिए वारंटी पीरियड में फोन सही नहीं होगा। कस्टमर को इसके लिए पैसे देने होंगे।
हालांकि, उस व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने फोन को कंपनी के निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किया था। इसके बावजूद फोन खराब हो गया। उन्होंने रिफंड की मांग की, लेकिन कंपनी ने साफ इनकार कर दिया।
वॉटर प्रोटेक्शन का दावा पड़ा महंगा
कंज्यूमर कोर्ट ने मोटोरोला की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान Motorola ने कहा कि फोन वॉटरप्रूफ नहीं, बल्कि वॉटर-रेसिस्टेंट था। कंपनी ने यह भी बताया कि वारंटी में पानी से होने वाले नुकसान का कवर शामिल नहीं है।
हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने पाया कि विज्ञापनों में अंडरवॉटर प्रोटेक्शन फीचर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। इससे किसी भी ग्राहक को लगना स्वाभाविक है कि फोन पानी में खराब नहीं होगा। कमीशन ने माना कि कंपनी के मार्केटिंग दावे पूरी तरह गुमराह करने वाले थे।
Motorola को देना होगा रिफंड और कंपनसेशन
कमीशन ने Motorola को फोन की पूरी कीमत ₹27,058 लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, कंपनी को मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए ₹50,000 मुआवजा देने को कहा गया। कानूनी खर्च के लिए कंपनी को ₹2,000 भी देने होंगे।
आयोग ने साफ कहा कि कंपनियों को अपने ऐड में सही जानकारी देनी चाहिए। वे केवल वारंटी की शर्तों का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
