क्या अब OTT फिल्मों के लिए भी जरूरी होगा Censor Board का सर्टिफिकेट? जानें पूरा मामला


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Jul 12, 2026



केंद्र सरकार देश के डिजिटल कंटेंट नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। अब OTT प्लेटफॉर्म पर सीधे रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए भी सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट जरूरी हो सकता है। दरअसल हाल ही में ‘सतलुज’ को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। इस विवाद ने थिएटर और OTT  के नियमों पर एक नई बहस छेड़ दी है।अब OTT पर रिलीज़ होने वाली फिल्मों के लिए भी सर्टिफिकेशन जरूरी करने की मांग उठ रही है।

अगर ये नए नियम लागू होते हैं, तो देश में OTT प्लेटफॉर्म के लिए नियम काफी सख्त हो जाएंगे। साथ ही, फिल्ममेकर्स को भी नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का पालन करना होगा।

क्यों बदल सकते हैं OTT के नियम?

 OTT नियमों में बदलाव  के पीछे एक बड़ी वजह है। अभी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड (CBFC) का सर्टिफिकेट जरूरी होता है। लेकिन डायरेक्ट OTT पर आने वाली फिल्मों के लिए यह नियम लागू नहीं होता।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्में एक अलग सिस्टम के तहत काम करती हैं। इन्हें रिलीज से पहले किसी सरकारी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं पड़ती है।

बता दें कि फिल्म ‘सतलुज’ की रिलीज पर विवाद होते ही यह बहस तेज हो गई। इस मामले के बाद सरकार एक्शन में आ गई है। ऐसे में अब मौजूदा डिजिटल नियमों को रिव्यु किया जा रहा है।

OTT फिल्मों पर बढ़ सकती है सख्ती

डिजिटल कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार अब नए नियमों पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार OTT फिल्मों के लिए सर्टिफिकेशन जरूरी करने पर विचार कर रही है। इस नए प्रस्ताव से डिजिटल फिल्मों की निगरानी काफी बढ़ जाएगी। इसके बाद थिएटर और ओटीटी, दोनों के लिए एक जैसी ही सर्टिफिकेशन प्रक्रिया लागू होगी। 

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फिल्में चाहे किसी भी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हों। उनके लिए रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स बिल्कुल एक जैसे होने चाहिए।

OTT यूज़र्स और प्लेटफॉर्म्स पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ये नियम लागू होते हैं, तो OTT प्लेटफॉर्म पर सीधा असर पड़ेगा। स्ट्रीमिंग कंपनियों को कंटेंट और रिलीज के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है। 

वहीं, जो फिल्म निर्माता सीधे डिजिटल रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें भी नई सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इससे फिल्मों को ऑनलाइन रिलीज करने में ज्यादा समय लग सकता है।

नए नियमों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

इस फैसले को लेकर अब दो तरह की राय सामने आ रही हैं। नियम का समर्थन करने वालों का मानना है कि इससे सभी फिल्मों के लिए एक जैसे नियम बन जाएंगे। वहीं, दूसरी तरफ जानकारों का कहना है कि इससे कागजी कार्रवाई और लीगल फॉर्मेलिटी काफी बढ़ जाएंगी।

वहीं क्रिटिक्स का कहना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पहले से ही डिजिटल गाइडलाइंस का पालन करते हैं। ऐसे में नए नियम आने से फिल्में रिलीज होने में देरी होगी। साथ ही, फिल्ममेकर्स के लिए कानूनी कागजी कार्रवाई भी काफी बढ़ जाएगी। हालांकि स्टेकहोल्डर्स और लीगल एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद ही फाइनल आउटलाइन तैयार की जाएगी।

क्या होगा सरकार का अगला कदम?

फिलहाल, सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। उम्मीद है कि सरकार कोई भी आखिरी फैसला लेने से पहले ‘IT नियमों’ में बदलावों पर विचार करेगी। अगर नए नियम लागू होते हैं, तो उनका असर फिल्म मेकर्स, OTT प्लेटफॉर्म और दर्शकों तक दिखेगा। इतना ही नहीं, भारत में OTT पर फिल्मों की रिलीज़ और सर्टिफिकेशन का तरीका भी बदल सकता है।

60- Words Summary:

OTT पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए भी जल्द सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट जरूरी हो सकता है। ‘सतलुज’ विवाद के बाद केंद्र सरकार डिजिटल कंटेंट नियमों की समीक्षा कर रही है। नए नियम लागू होने पर OTT प्लेटफॉर्म और फिल्ममेकर्स को नई सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अपनानी होगी। इससे थिएटर और OTT के लिए एक जैसे नियम लागू हो सकते हैं। फिलहाल, सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है।


Bhawna Mishra
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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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