भारत में ‘वर्क फ्रॉम होम’ मॉडल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्यूल बचाने के लिए नागरिकों से रिमोट वर्क अपनाने की अपील की है। ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस को देखते हुए पुराने कोविड में अपनाए गए रिमोट वर्क मॉडल को फिर से बढ़ावा देने की बात कही।
इसी कड़ी में IT कर्मचारियों के संगठन NITES ने भी सरकार से मांग की है। संगठन का कहना है कि जहां भी संभव हो। वहां अनिवार्य ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ लागू किया जाए।

IT सेक्टर में फिर बढ़ी वर्क फ्रॉम होम की मांग
NITES ने केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने यूनियन ने IT क्षेत्र के लिए ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ पर एडवाइजरी जारी करने की मांग की है। उनका तर्क है कि रिमोट वर्किंग लागू करने से फ्यूल की खपत कम हो सकती है।
इतना ही, पॉल्यूशन और ट्रैफिक जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी। साथ ही, कर्मचारियों का स्ट्रेस कम करने में भी यह मॉडल मददगार साबित हो सकता है।
क्या फिर लौटेगा WFH कल्चर?
ग्लोबल टेंशन और बढ़ते तेल संकट के बीच वर्क फ्रॉम होम मॉडल एक बार फिर सुर्खियों में है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का डर है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल एक्सपोर्ट करता है।
ऐसे में फ्यूल बचाना अब बड़ा आर्थिक मुद्दा बन गया है। इसी आर्थिक चिंता को देखते हुए PM मोदी ने कंपनियों को रिमोट वर्क अपनाने की सलाह दी है।
PM की अपील के बाद IT सेक्टर ने भी तेजी से प्रतिक्रिया दी। यूनियन NITES का कहना है कि महामारी के दौरान साबित हो चुका है कि घर से काम करने पर भी प्रोडक्टिविटी प्रभावित नहीं होती।
भारत में पहले भी सफल रहा WFH मॉडल
भारत ने महामारी के दौरान दुनिया का सबसे बड़ा ‘रिमोट-वर्क’ ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया था। उस दौरान आईटी सेक्टर में वर्क-फ्रॉम-होम 5% से बढ़कर रिकॉर्ड 70% तक पहुंच गया था। भारत का IT सेक्टर करीब 5.8 मिलियन लोगों को रोजगार देता है।
उस समय लाखों कर्मचारियों का रोजाना ऑफिस आना-जाना लगभग बंद हो गया था। इसी दौर में क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी टूल्स, डिजिटल कोलैबोरेशन प्लेटफॉर्म और हाइब्रिड सिस्टम्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि तकनीकी रूप से भारत आज भी रिमोट वर्क के लिए पूरी तरह तैयार है। असली चुनौती अब कंपनियों की सोच और कॉर्पोरेट कल्चर को बदलना है।
कंपनियां WFH के लिए कितनी तैयार?
जहां एक ओर कई कंपनियां अब हाइब्रिड और फ्लेक्सिबल वर्क मॉडल के लिए तैयार दिख रही हैं। हालांकि, पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम को लेकर अभी भी सतर्कता बनी हुई है। आईटी, फिनटेक और मीडिया जैसे डिजिटल क्षेत्रों के लिए हाइब्रिड मॉडल आसान है। इसका एक मुख्य कारण यह है कि उनका ज्यादातर काम ऑनलाइन होता है।
वहीं, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टर्स में कर्मचारियों की मौजूदगी आज भी अनिवार्य है।
रिमोट वर्क के फायदे और चुनौतियां
यह बहस अब केवल आराम या सुविधा तक सीमित नहीं है। बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक और सामाजिक कारण हैं। इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि इससे न केवल फ्यूल की बचत होगी और ट्रैफिक की समस्या से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, कर्मचारियों का समय और आने-जाने का खर्च बचता है। साथ ही, मेट्रो शहरों से बाहर रहने वाले लोगों को भी नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं।
वहीं, आलोचकों का मानना है कि लंबे समय तक रिमोट वर्क से इनोवेशन, टीमवर्क और मेंटरशिप प्रभावित हो सकती है। ऑफिस कल्चर कमजोर पड़ने की भी चिंता जताई जा रही है।
ऑफिस या WFH, क्या होगा अगला कदम?
अब बड़ा सवाल यह है कि भारत का भविष्य का वर्कप्लेस कैसा होगा। क्या कंपनियां पूरी तरह ऑफिस लौटेंगी, हाइब्रिड मॉडल अपनाएंगी या जरूरत पड़ने पर फिर रिमोट वर्क का सहारा लेंगी। फिलहाल, पीएम मोदी के सुझाव से भारत के वर्क कल्चर के भविष्य को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
60-Words Summary:
भारत में ‘वर्क फ्रॉम होम’ मॉडल फिर चर्चा में है। पीएम नरेंद्र मोदी ने फ्यूल बचाने के लिए रिमोट वर्क अपनाने की अपील की है। IT संगठन NITES ने भी अनिवार्य WFH की मांग उठाई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे ट्रैफिक, पॉल्यूशन और खर्च कम हो सकते हैं। कोविड काल में यह मॉडल सफल रहा था। अब देश में ऑफिस और रिमोट वर्क के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
