देश की सबसे बड़ी IT कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इस वक्त एक बड़े विवाद के घेरे में है। कंपनी के वर्कप्लेस कल्चर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने नासिक स्थित BPO यूनिट की जांच की।
आयोग की रिपोर्ट में कुछ ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिन्होंने कंपनी के वर्कप्लेस कल्चर पर बहस छेड़ दी है। खासतौर पर कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

धार्मिक भेदभाव के आरोपों से बढ़ी चर्चा
महिला आयोग की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में TCS नासिक के दफ्तर को बेहद ‘टॉक्सिक’ और खतरनाक बताया गया है। कमेटी ने वहां सेक्सुअल हैरेसमेंट जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
कर्मचारियों को धमकाने और अधिकारों के दुरुपयोग की बात भी सामने आई है। कुछ मामलों में धार्मिक आधार पर डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कमेटी ने शिकायत प्रणाली को भी कमजोर बताया। आयोग ने साफ कहा है कि वहां POSH कानून के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले दावे
दरसअल मामला तब सामने आया, जब कई महिला कर्मचारियों ने नासिक स्थित फैसिलिटी में उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। आरोप सीनियर अधिकारियों पर लगाए गए थे।
इसके बाद नासिक पुलिस ने कई FIR दर्ज कीं। जांच के दौरान सीनियर स्टाफ और HR कर्मचारियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
क्या हैं महिला कर्मचारियों के आरोप?
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की रिपोर्ट में कई गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महिला कर्मचारियों को लंबे समय तक उत्पीड़न और डराने-धमकाने का सामना करना पड़ा। उनकी शिकायतों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। POSH अवेयरनेस वर्कशॉप भी नियमित रूप से आयोजित नहीं की गई। इतना ही नहीं, कर्मचारियों को दफ्तर से कोई मदद नहीं मिली।
रिपोर्ट में इंटरनल कमिटी के व्यवहार पर हैरानी जताई गई। आयोग ने कहा कि कंपनी ने POSH कानून की धारा 19 का ठीक से पालन नहीं किया। इस कानून के तहत दफ्तरों में नियमित ट्रेनिंग और जागरूकता प्रोग्राम चलाना अनिवार्य है।
9 FIR और पुलिस का बड़ा एक्शन
जांच का दायरा बढ़ने के साथ मामला और गंभीर होता गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस केस में अब तक 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। कई सीनियर कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
जांच के दौरान महाराष्ट्र पुलिस ने करीब 40 दिनों तक महिला अंडरकवर अधिकारियों को ऑफिस में तैनात रखा। बताया जा रहा है कि नेशनल कमिशन ऑफ वीमेन की रिपोर्ट 50 से ज्यादा पन्नों की है।
इस रिपोर्ट में, Gen Z महिला कर्मचारियों को टारगेट करने और उन पर धार्मिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं।
सिर्फ TCS नहीं, पूरे IT सेक्टर पर सवाल
यह मामला सिर्फ TCS तक सीमित नहीं है। फिलहाल, TCS भारत की सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनियों में शामिल है। कंपनी के दुनियाभर में 5.84 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं।
इसका एनुअल रेवेन्यू करीब 30 अरब डॉलर बताया जाता है। ऐसे में इस कंट्रोवर्सी ने पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है।
अब IT और BPO सेक्टर में वर्कप्लेस सिक्योरिटी, POSH नियमों के पालन, HR की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी बहस तेज हो गई है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मामले के बाद बड़ी IT कंपनियों में POSH नियमों की जांच और सख्त हो सकती है।
क्या ऑफिस में काम करने वाली महिलाएं सुरक्षित हैं?
IT सेक्टर हमेशा से अपनी बेहतरीन प्रोफेशनलिज्म के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन नासिक की इस घटना ने सबको चौंका दिया है।
अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या तेजी से बढ़ती कंपनियां अपने कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल दे पा रही हैं? क्या कंपनियों का इंटरनल सिस्टम सच में भरोसेमंद है? या फिर जरूरत पड़ने पर कर्मचारी खुद को अकेला पाते हैं?
ऐसे में यह विवाद अब पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर की जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहा है।
60-Words Summary:
TCS के वर्कप्लेस कल्चर को लेकर कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है। यह मामला राष्ट्रीय महिला आयोग की नासिक BPO यूनिट की जांच के बाद सामने आया। रिपोर्ट में उत्पीड़न, धमकाने और धार्मिक भेदभाव जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आयोग ने कहा कि POSH नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। इस विवाद ने पूरे आईटी सेक्टर में महिला सुरक्षा और HR की जिम्मेदारियों पर सवाल उठा दिए हैं।
