महाराष्ट्र में बड़ा विवाद सामने आया है। 15 लाख ऑटो और टैक्सी ड्राइवर 4 मई से पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन बढ़ेगा। विवाद की मुख्य वजह सरकार का एक नया नियम है। इस नियम के तहत सभी कमर्शियल ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा आना अनिवार्य कर दिया गया है।
ड्राइवर यूनियनों ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर नियम वापस नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा। इस विरोध के कारण मुंबई और पुणे समेत कई बड़े शहरों में परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर खासतौर पर रोजाना ऑटो-टैक्सी से सफर करने वालों पर पड़ेगा।

अब ड्राइवरों को सीखनी होगी मराठी?
महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए नया नियम जारी किया है। अब सभी ड्राइवर्स को बेसिक मराठी पढ़ना और लिखना आना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्हें मराठी बोलना भी आना चाहिए। यह नियम 1 मई से पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। नियम का पालन करवाने के लिए RTO अधिकारी वेरिफिकेशन कैंपेन भी चलाएंगे।
जो ड्राइवर इस नियम को पूरा नहीं कर पाएंगे। उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। उनका परमिट सस्पेंड या हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है। इससे यह सिर्फ नियम नहीं। उनकी रोज़ी-रोटी का मामला बन जाता है।
सरकार को 28 अप्रैल तक का अल्टीमेटम
यूनियन लीडर्स ने सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह नियम लाखों परिवारों का कामकाज छीन लेगा। रिपोर्ट्स की मानें तो , ड्राइवर्स को बिना किसी शर्त के परमिट दिए गए थे। ऐसे में अचानक नया नियम लागू होने से उनमें डर और आर्थिक तनाव बढ़ गया है।
यूनियन ने अपनी मांगें रखने के लिए 28 अप्रैल तक का समय दिया है। अगर सरकार ने बात नहीं मानी, तो ड्राइवर्स 4 मई से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू करेंगे।
मराठी को बढ़ावा देने की सरकारी पहल
सरकार ने अपने इस फैसले का पूरी तरह बचाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर बातचीत के लिए यह नियम जरूरी है। सरकार के अनुसार, भाषा की समस्या से कई बार गलतफहमी और विवाद होते हैं। ऐसे में यह पॉलिसी राज्य में मराठी भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश का एक हिस्सा है।
यात्रियों को झेलनी पड़ेगी भारी परेशानी
अगर यह विरोध प्रदर्शन होता है। तो रोजाना सफर करने वालों पर असर पड़ सकता है। सड़कों पर ऑटो-रिक्शा और टैक्सियों की भारी कमी देखने को मिलेगी। इससे दफ्तर और कॉलेज जाने वाले यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ सकता है। टैक्सियों की कमी के कारण ओला/उबर के किराए में भारी उछाल आने की आशंका है। उम्मीद है कि लगभग 15 लाख ड्राइवर इस आंदोलन में शामिल होंगे।
पहचान और रोजगार पर सवाल
भाषा के इस कंट्रोवर्सी ने अब पहचान और रोजगार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर सरकार इसे मराठी भाषा को बढ़ावा देने में अहम कदम मान रही है। वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे पूरी तरह अव्यावहारिक बता रहे हैं। आने वाले कुछ हफ्ते इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। ऐसे में अब देखना यह होगा कि सरकार नियम बदलती है या नहीं। यदि हां, तो इसका भाषा और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा।
60-Word Summary:
महाराष्ट्र में नए मराठी भाषा नियम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 15 लाख ऑटो और टैक्सी ड्राइवर 4 मई से हड़ताल की तैयारी में हैं। सरकार ने हड़ताल ड्राइवरों के लिए मराठी जानना जरूरी किया है। यूनियन ने 28 अप्रैल तक अल्टीमेटम दिया है। विरोध बढ़ने पर मुंबई और पुणे में परिवहन सेवाएं प्रभावित होगी। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
