सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है। दरअसल इन दिनों ‘1 रोटी ट्रिक’ की खूब चर्चा हो रही है। दावा है कि इस आसान ट्रिक से ग्राहक और रेस्टोरेंट दोनों ज़ोमैटो (Zomato) की प्लेटफॉर्म फीस और कमीशन से बच सकते हैं।
सोशल मीडिया और स्टार्टअप की दुनिया में इस ट्रिक की खूब चर्चा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह Zomato की एक बड़ी कमी है। अगर लोग इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं तो कंपनी को भारी नुकसान होगा। इससे फूड डिलीवरी कंपनी के पूरे बिजनेस मॉडल को बड़ा झटका लग सकता है।

फूड डिलीवरी मॉडल पर उठे सवाल
इन्वेस्टर प्रेम सोनी ने सोशल मीडिया पर इस ट्रिक के बारे में बताया है। उनके मुताबिक ग्राहक सबसे पहले ज़ोमैटो पर बहुत छोटा ऑर्डर देता है। उदाहरण के लिए ग्राहक सिर्फ चालीस रुपये की एक रोटी ऑर्डर करता है। इसके बाद वह सीधे फोन या वॉट्सऐप के जरिए रेस्टोरेंट से बात करता है। फिर वह बाकी का सारा खाना ज़ोमैटो के बाहर से सीधे रेस्टोरेंट से मंगवा लेता है।
इसके बाद ग्राहक सीधे UPI के जरिए रेस्टोरेंट को पैसे भेज देता है। रेस्टोरेंट वाले भी चालाकी दिखाते हैं। वे ऐप के बाहर वाले बड़े ऑर्डर को ज़ोमैटो के छोटे ऑर्डर के साथ ही पैक कर देते हैं।
फिर ज़ोमैटो का डिलीवरी पार्टनर उस पूरे पैकेट को ग्राहक तक पहुंचा देता है। डिलीवरी बॉय को इस बात की भनक तक नहीं होती कि ज्यादातर खाने का बिल ऐप पर बना ही नहीं है।
फूड डिलीवरी कंपनियों पर क्यों बढ़ा दबाव?
इस पूरी ट्रिक से कंपनियों की कमाई के रास्ते बंद हो जाते हैं। इस लूपहोल की वजह से यह तीन बड़ी चीजें हो रही हैं-
ग्राहक प्लेटफॉर्म फीस और सर्ज चार्ज (महंगा डिलीवरी चार्ज) देने से बच जाते हैं।
रेस्टोरेंट को कंपनी को दिया जाने वाला भारी कमीशन नहीं देना पड़ता।
पूरा खाना कंपनी के डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल कर कस्टमर तक पहुंच जाता है। लेकिन कंपनी को इसका पूरा पैसा नहीं मिलता।
डिलीवरी इकोनॉमी पर छिड़ा नया विवाद
Zomato जैसी कंपनियों की कमाई कई चीज़ों पर टिकी होती है। ये कंपनी कमीशन, ग्राहकों की प्लेटफॉर्म फीस और डिलीवरी चार्ज से कमाती है। विज्ञापनों से भी इनकी अच्छी कमाई होती है। लेकिन इस ट्रिक से कंपनी की बिलिंग नहीं हो पाती। लोग फ्री में उनके डिलीवरी नेटवर्क का फायदा उठा लेते हैं। इससे कंपनी का पूरा मुनाफा मॉडल कमजोर पड़ सकता है।
हालांकि यह विवाद बेहद गलत समय पर सामने आया है। ज़ोमैटो इस समय अपना मुनाफा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए कंपनी लगातार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा रही है। इस साल की शुरुआत में ही कंपनी ने बड़ा कदम उठाया था। तब प्लेटफॉर्म फीस ₹12.50 से बढ़ाकर ₹14.90 प्रति ऑर्डर कर दी गई थी।
क्या सच में काम करती है यह ट्रिक?
इस ट्रिक को लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। कई लोग इस तरीके के सही होने पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि रेस्टोरेंट ऐसे फर्जी ऑर्डर को मना कर सकते हैं। इसके अलावा डिलीवरी पार्टनर भी बड़े पैकेट देखकर शक कर सकते हैं।
अगर खाना गायब या गलत निकला, तो रेस्टोरेंट और ग्राहक में झगड़ा हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां बहुत समझदार हैं। वे डेटा एनालिटिक्स के जरिए ऐसे ऑर्डर पैटर्न पर नजर रखती हैं।
Zomato और Swiggy के लिए चुनौती
फूड डिलीवरी कंपनियों के सामने अब अपने नेटवर्क को बचाने की बड़ी चुनौती है। इस चालाकी को रोकने के लिए ज़ोमैटो और स्विगी कड़े नियम ला सकते हैं। अब रेस्टोरेंट पर पैनी नजर रखी जाएगी और खाने के पैकेट का वजन भी चेक होगा। कंपनियां अपना घाटा पूरा करने के लिए प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, इन नए नियमों से खाना डिलीवर होने में देरी होगी। इससे ऐप इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहकों की परेशानी भी बढ़ जाएगी।
Zomato की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं
Zomato ने इस वायरल ट्रिक पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। कंपनी ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। उसने इस हेरफेर की पुष्टि भी नहीं की है। इसके बावजूद इस चर्चा ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है।
अब लोग फूड डिलीवरी कंपनियों की कमाई पर बात कर रहे हैं। रेस्टोरेंट के मुनाफे पर भी चर्चा हो रही है। लोग लगातार बढ़ती डिलीवरी फीस पर खुलकर बात कर रहे हैं।
भारत का ऑनलाइन फूड मार्केट तेजी से बदल रहा है। इस विवाद ने एक बात साफ कर दी है।अब कंपनियों के लिए सुविधा और मुनाफे के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है।
60-Words Summary:
सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘1 रोटी ट्रिक’ ने नई बहस छेड़ दी है। दावा है कि इससे यूजर्स और रेस्टोरेंट Zomato की फीस और कमीशन से बच सकते हैं। एक्सपर्ट्स इसे फूड डिलीवरी मॉडल की बड़ी कमजोरी मान रहे हैं। उनका कहना है कि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल कंपनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, इस विवाद ने बढ़ती डिलीवरी फीस और ऑनलाइन फूड बिजनेस पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
