देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे आम जनता की जेब पर बोझ काफी बढ़ गया है। ऐसे में राज्य सरकारों पर वैट (VAT) कम करने का भारी दबाव है। ट्रांसपोर्टर्स, विपक्षी दल और डीलर लगातार टैक्स कटौती की मांग कर रहे हैं। पिछले कुछ ही दिनों में फ्यूल के प्राइस कई बार बढ़ चुके हैं। बढ़ती कीमतों से परेशान लोग अब सरकारों से बड़ी राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

11 दिनों में चार बार बढ़े दाम
बता दें कि मई 2026 के मध्य से फ्यूल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में कीमतें चार बार बढ़ी हैं। महज 11 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल ₹7.5 प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं। 25 मई को पेट्रोल और डीजल करीब ₹2.6 से ₹2.7 प्रति लीटर महंगे हुए। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है।
माना जा रहा है कि गल्फ देशों में तनाव और सप्लाई की कमी के डर से कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं। इसका असर अब इंडियन मार्केट्स पर भी दिखने लगा है।
पेट्रोल-डीजल पर VAT कम करने की अपील
देश में जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र ने सभी राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर VAT कम करने की अपील की है। दरअसल, हर राज्य में फ्यूल पर टैक्स की रेट अलग-अलग है। कई राज्यों में टैक्स 30% तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग शहरों में तेल के दामों में इतना बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को तगड़ा नुकसान हो रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां अभी भी अंडर-रिकवरी का सामना कर रही हैं। टैक्स हटाकर देखा जाए, तो कंपनियों को पेट्रोल बेचने पर प्रति लीटर ₹13 का नुकसान है। वहीं डीजल पर यह नुकसान ₹38 प्रति लीटर तक बैठता है। इससे साफ है कि रिटेल प्राइस बढ़ने के बाद भी कंपनियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
ऐसे में सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ जनता को महंगाई से बचाना है। तो दूसरी तरफ देश के रेवेन्यू को खाली होने से भी रोकना है।
ढ़ती कीमतों पर विपक्ष सख्त
ईधन की कीमतों को लेकर राज्यों में सियासत और दबाव दोनों बढ़ गए हैं। महाराष्ट्र में विपक्ष ने VAT कटौती में देरी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। वहीं, मध्य प्रदेश और राजस्थान में ट्रांसपोर्टर्स और डीलर एसोसिएशनों ने भी टैक्स कम करने की गुहार लगाई है। इनका कहना है कि महंगे डीजल से लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ रहा है। जिससे पूरा कारोबार मंदा पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में ट्रांसपोर्टर्स और पेट्रोलियम डीलर्स ने भी सरकार से टैक्स घटाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि महंगे डीजल के कारण लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ रहा है। जिससे बिजनेस गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
महंगे पेट्रोल-डीजल से बढ़ी EV की डिमांड
फ्यूल की बढ़ती कीमतों के बीच एक दिलचस्प बदलाव दिख रहा है। भारत में अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। पुणे जैसे बड़े शहरों में EV को लेकर इन्क्वायरी और बुकिंग अचानक बढ़ गई हैं। लोग खासकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। कुछ डीलर्स का कहना है कि यूजर्स अब ऐसा ऑप्शन देख रहे हैं। जिसका रनिंग-कॉस्ट बेहद कम हो।
सरकार के सामने बड़ा वित्तीय संकट
फ्यूल टैक्स को लेकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती से केंद्र को भारी नुकसान होगा। टैक्स कम करने से सरकारी खजाने को लगभग ₹1 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार सोच-समझकर कर कदम रख रही है।
दुनियाभर में ऊर्जा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। केंद्र और राज्य दोनों पर दबाव साफ दिख रहा है। एक तरफ महंगाई को नियंत्रित रखना जरूरी है।
दूसरी तरफ जनता की नाराजगी से भी बचना है। ऐसे में सरकार के लिए वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
60-Words Summary:
देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 11 दिनों में फ्यूल के दाम चार बार बढ़ चुके हैं। इससे जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टर्स और विपक्ष लगातार VAT कम करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार पर रेवेन्यू बचाने और लोगों को राहत देने का दोहरा दबाव है। बढ़ती कीमतों के बीच अब इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ने लगी है।
