हाल ही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी में पिछले पांच सालों में सैक्सुअल हैरेसमेंट संबंधित शिकायतों में भारी इजाफा हुआ है। यह जानकारी कंपनी के ऑफिशियल डेटा से मिली है। हैरानी की बात यह है कि ये आंकड़े ऐसे समय पर आए । जब कंपनी पहले से ही नासिक के एक उत्पीड़न मामले में फंसी हुई है।

आइए समझते है, क्या कहती है ये रिपोर्ट-
27 से 125 तक पहुंचा शिकायतों का आंकड़ा
TCS में शिकायतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। कंपनी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, FY 2021 में महज 27 मामले दर्ज थे। वही FY25 में यह संख्या बढ़कर 125 हो गई है। यह बढ़ोतरी अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे हुई है-
| वर्ष (FY) | मामलों की संख्या |
| FY21 | 27 |
| FY22 | 36 |
| FY23 | 49 |
| FY24 | 110 |
| FY25 | 125 |
क्यों बढ़ रही है शिकायतों की संख्या?
शिकायतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। जैसे-
1. TCS अपनी रिपोर्ट (BRSR) में दुनिया भर के कर्मचारियों का डेटा शामिल कर रही है। इसलिए शिकायतों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2. कर्मचारी अब ‘POSH लॉ’ और अपने राइट्स को बेहतर तरीके से समझते हैं। उन्हें पता है कि गलत व्यवहार होने पर कहां शिकायत करनी है।
3. तीसरा, अब कंपनी में कंप्लेंट रजिस्टर करना बहुत आसान हो गया है। कोई भी कर्मचारी बिना डरे अपनी बात कह सकता है।
4. इसके अलावा, वर्क कल्चर में भी बदलाव आया है। अब लोग चुप रहने के बजाय गलत बात के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार हैं।
यह ट्रेंड सिर्फ TCS तक सीमित नहीं है। पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर में ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग बढ़ रही है।
शिकायतों के बाद क्या एक्शन लिया गया?
TCS में शिकायतें तो बढ़ रही हैं। लेकिन उन्हें सुलझाने का काम बहुत धीरे चल रहा है। डेटा के मुताबिक, 2021 में सिर्फ 8 ऐसे मामले थे। जो 2025 में बढ़कर 23 हो गए हैं। कंपनी ने बताया कि इस साल 78 कम्प्लेंट सही पाई गई। इसके बाद भी, यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें सुलझाने में कितना समय लगेगा। रिपोर्ट में कुछ बातों को लेकर डिटेल्स साफ नहीं हैं।
नासिक केस से कंपनी पॉलिसी पर उठे सवाल
नासिक विवाद ने वर्कप्लेस की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न की खबरें अब बढ़ती जा रही हैं। कई कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। जाँच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है।
कंपनी में POSH नियम तो मौजूद हैं। लेकिन यूनिट लेवल पर उन्हें नजरअंदाज किया गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बड़ी कंपनियों में पॉलिसी कितनी सही तरह से लागू हो रही है।
अब कर्मचारी खुलकर रख रहे हैं अपनी बात
TCS का डेटा बताता है कि अब ऑफिस में काम करने का माहौल बदल रहा है। शिकायतों का बढ़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब कर्मचारी अपनी बात खुलकर रख रहे हैं। ऐसे में अब असली चुनौती यह है कि मामलों का समय पर समाधान हो। शिकायत कमिटी मजबूत हों। साथ ही वर्कप्लेस सुरक्षित बने।
कुल मिलाकर, कंपनियों को अब सिर्फ नियम बनाने तक नहीं रुकना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑफिस में हर कर्मचारी सुरक्षित महसूस करे। और नियमों का सख्ती से पालन हो।
60-Word Summary:
TCS में पिछले पांच सालों में सैक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। आंकड़ा 27 से बढ़कर 125 तक पहुंच गया है। अब ज्यादा लोग शिकायत कर रहे हैं। लेकिन कई मामले अभी भी सुलझे नहीं हैं। नासिक विवाद ने कंपनी की पॉलिसी पर सवाल खड़े किए हैं। अब कंपनियों के लिए चुनौती केवल नियम बनाना नहीं है। बल्कि उन्हें सख्ती से लागू करना और एम्प्लॉयीज़ को सुरक्षित माहौल देना है।
