सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बिना ऐड या इंटरव्यू के नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाएगा। अब सरकारी नौकरी में तय नियमों का पालन करना जरूरी होगा। इस आदेश से उन कर्मचारियों को झटका लगा है। जो बिना सही प्रक्रिया के भर्ती हुए थे।

शॉर्टकट से मिली नौकरी अब इल्लीगल
सरकारी नौकरियों में अब गलत तरीके से एंट्री नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि परमानेंट जॉब के लिए कोई शॉर्टकट नहीं चलेगा। अदालत के मुताबिक, सरकारी जॉब्स पर भर्ती के लिए ट्रांसपेरेंट प्रोसेस अपनाना जरूरी है। बिना एडहॉक या एग्जामिनेशन के मिली नौकरी को अवैध माना जाएगा। ऐसे कर्मचारी भविष्य में खुद को परमानेंट करने का दावा भी नहीं कर पाएंगे।
अदालत ने क्यों लिया यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकारी नौकरी में सबको बराबर का मौका मिलना चाहिए। बिना तय प्रक्रिया के किसी को परमानेंट करना सही नहीं है। ऐसा करना उन लोगों के साथ धोखा है, जो काबिल हैं। अगर भर्ती का सही तरीका नहीं अपनाया गया, तो यह नियमों के खिलाफ होगा। गौरतलब है कि कोर्ट इस रिक्रूटमेंट प्रोसेस को स्पष्ट और ईमानदार बनाना चाहती है।
हरियाणा सरकार की नीति पर चली कैंची
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के फैसले पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एडहॉक एम्प्लॉयीज को परमानेंट करने वाली सरकारी पॉलिसी को पूरी तरह सही नहीं माना। अदालत ने साफ किया कि भर्ती नियमों को नजरअंदाज कर बनाई गई ऐसी पॉलिसी मान्य नहीं होगी। ऐसे में बिना सही परीक्षा या इंटरव्यू के किसी भी कर्मचारी को परमानेंट नहीं किया जा सकता।
क्या मौजूदा कर्मचारियों राहत मिलेगी?
अदालत के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि मौजूदा कर्मचारियों का क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि जो कर्मचारी पहले से काम कर रहे हैं। उन्हें तुरंत नौकरी से निकाला नहीं जाएगा। हालांकि, काम जारी रखने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उन्हें परमानेंट एम्प्लॉई का दर्जा मिल जाएगा। अदालत ने बताया कि नौकरी पर बने रहना और परमानेंट होना। दोनों अलग-अलग हैं।
कोर्ट ने पुराने कानून पर लगाई मुहर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साल 2006 के मशहूर ‘उमा देवी केस’ का जिक्र किया है। इस केस की बात करते हुए SC ने कहा कि रेगुलरिज़ेशन कोई सामान्य नियम नहीं है। यह छूट केवल बहुत खास और गिने-चुने मौकों पर ही दी जा सकती है। नौकरी पक्की करने के नाम पर नियुक्ति संबंधी नियमों को नहीं तोड़ा जा सकता।
60-Word Summary:
सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने सरकारी भर्ती पर सख्त फैसला सुनाया है। बिना परीक्षा या इंटरव्यू के नौकरी पाने वालों को नियमित नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि रिक्रूटमेंट प्रोसेस पूरी तरह ट्रांसपेरेंट होना चाहिए। हरियाणा की पॉलिसी पर भी सवाल उठे हैं। मौजूदा कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिली है।। कोर्ट ने ‘इस मामले में उमा देवी केस’ का हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अपवाद खास परिस्थितियों में ही संभव है।
