दुनिया भर में भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। साथ ही, बिजली के भारी-भरकम बिलों ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस स्थिति में वैज्ञानिक अब एयर कंडीशनिंग के नए ऑप्शन विकसित कर रहे हैं। इसी दिशा में ‘Nescod’ तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रही है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि यह लगातार बिजली खर्च किए बिना भी कूलिंग प्रदान करती है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत
कुछ रिसर्चर्स ने दावा किया है कि, यह तकनीक कई क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह विशेष रूप से भीषण गर्मी वाले इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है। साथ ही, अस्थिर बिजली आपूर्ति वाले ग्रामीण क्षेत्रों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। कम आय वाले परिवारों के लिए भी यह एक किफायती विकल्प है। अत्यधिक लू और बढ़ते तापमान का सामना कर रहे स्थानों के लिए यह सिस्टम किसी वरदान से कम नहीं है।
आखिर क्या है Nescod सिस्टम?
‘Nescod’ एक नई कूलिंग तकनीक है। जिसे ऊर्जा बचाने वाले विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसका पूरा नाम है- ‘No Electricity and Sustainable Cooling on Demand’। यानी ऐसी तकनीक, जो बिना लगातार बिजली खर्च किए जरूरत के मुताबिक कूलिंग दे सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिस्टम को King Abdullah University of Science and Technology (KAUST) के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर Peng Wang के नेतृत्व में विकसित किया है।
यह तकनीक पारंपरिक एसी की तरह कंप्रेसर या रेफ्रिजरेंट साइकिल पर निर्भर नहीं करती। इसमें कूलिंग के लिए अमोनियम नाइट्रेट और पानी के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। खास बात यह है कि इस सिस्टम को दोबारा चार्ज करने के लिए केवल सोलर एनर्जी की आवश्यकता होती है।
कैसे काम करती है यह कूलिंग तकनीक?
इस सिस्टम का आधार ‘एंडोथर्मिक डिसोल्यूशन’ प्रक्रिया है। आसान भाषा में समझें तो, जब अमोनियम नाइट्रेट पानी में घुलता है। तब यह आसपास की गर्मी को सोखने लगता है। इससे आसपास का तापमान तेजी से नीचे आ जाता है। रिसर्च टीम के अनुसार, टेस्टिंग के दौरान इस तकनीक ने करीब 20 मिनट में तापमान को 25°C से घटाकर लगभग 3.6°C तक पहुंचा दिया।
कूलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इस्तेमाल किए गए मटीरियल को दोबारा तैयार किया जाता है। इसके लिए सोलर एनर्जी की मदद ली जाती है।इसी कारण इसे बिजली बचाने वाला एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
बढ़ती गर्मी के बीच क्यों खास है यह तकनीक?
दुनियाभर में बढ़ती गर्मी के कारण कूलिंग की डिमांड तेजी से बढ़ी है। एसी और फ्रिज के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली के ग्रिड और लोगों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में भी भारी बढ़ोतरी हो रही है। ‘इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी’ के अनुसार, 2050 तक केवल भारत में ही एक अरब से ज्यादा एसी हो सकते हैं।
वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बिजली का संकट और बढ़ सकता है। साथ ही, शहरों में बढ़ती गर्मी और पॉल्यूशन जैसी चुनौतियां भी गंभीर रूप लेंगी। यही कारण है कि बढ़ती गर्मी के बीच यह तकनीक काफी अहम मानी जा रही है।
क्या ‘Nescod’ पारंपरिक एसी की जगह लेगा?
फिलहाल ऐसा संभव नहीं लगता। बताया जा रहा है कि यह तकनीक अभी अपने शुरुआती फेज में है। अभी इसका उपयोग छोटे स्तर पर कूलिंग, दवाइयों और खाने को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर है। वही ग्रामीण इलाकों और इमरजेंसी कूलिंग के लिए भी यह एक शानदार विकल्प है।
दूसरी ओर, बड़े कमरों को जल्दी ठंडा करने और ह्यूमिडिटी को कंट्रोल करने के लिए भी AC अब जरूरी है। कुल मिलाकर, कम बिजली वाले इलाकों में यह तकनीक बहुत फायदेमंद रहेगी।
AC से हटकर लोग क्यों ढूंढ रहे हैं नए विकल्प?
इसकी सबसे बड़ी वजह भारी-भरकम बिजली बिल और AC की बढ़ती कीमतें हैं। भीषण गर्मी में AC का लोड बढ़ने से बिजली ग्रिड भी फेल हो रहे हैं। साथ ही, पर्यावरण को होने वाला नुकसान और शहरों में बढ़ता तापमान बड़ी चिंता का विषय है। यही कारण है कि अब दुनिया भर में ‘पैसिव कूलिंग’ और ‘मिट्टी के कूलिंग सिस्टम’ जैसी तकनीकों में रुचि बढ़ रही है।
भारत में भी लोग अब नेचुरल वेंटिलेशन और मिट्टी से बनी ट्रेडिशनल कूलिंग तकनीकों को अपना रहे हैं। यह बदलाव भविष्य की जरूरतों और बजट को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
बिना बिजली कूलिंग के संभावित फायदे
अगर Nescod जैसी तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाए, तो कई बड़े फायदे मिल सकते हैं। सबसे पहले, इलेक्ट्रिसिटी कंजम्पशन में कमी आ सकती है। इससे एनर्जी पर दबाव भी घटेगा। कार्बन उत्सर्जन कम होने की भी उम्मीद है। यह पर्यावरण के लिए फायदेमंद हो सकता है।
ऐसे इलाकों में भी कूलिंग संभव हो सकती है, जहां बिजली का ग्रिड मजबूत नहीं है। इतना ही नहीं, ऑपरेटिंग खर्च भी कम हो सकता है। महंगे एयर कंडीशनर पर निर्भरता घट सकती है। यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए खास तौर पर उपयोगी मानी जा रही है। जहां तेज लू चलती है। वहां यह राहत दे सकती है। ऐसे में बढ़ते तापमान के बीच यह एक बेहतरीन सोल्यूशन के रूप में देखा जा रहा है।
दुनियाभर में तेजी से बदल रही है कूलिंग टेक्नोलॉजी
कूलिंग टेक्नोलॉजी की दुनिया तेज़ी से बदल रही है। बिना बिजली वाली कूलिंग में बढ़ती दिलचस्पी एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब दुनिया भर के वैज्ञानिक और कंपनियां सौर ऊर्जा और पैसिव कूलिंग जैसी नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। इसमें एआई (AI) आधारित ऊर्जा बचत और रिफ्लेक्टिव कूलिंग पेंट जैसे इनोवेशन शामिल हैं।
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, ऊर्जा की मांग भी आसमान छू रही है। आने वाले कुछ सालों में, सस्टेनेबल कूलिंग सिस्टम दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरत बनने वाला है।
60-Words Summary-
भीषण गर्मी और बढ़ते बिजली बिलों के बीच ‘Nescod’ तकनीक चर्चा में है। यह बिना लगातार बिजली खर्च किए कूलिंग देने का दावा करती है।एक्सपर्ट्स इसे ग्रामीण इलाकों और कम बिजली वाले क्षेत्रों के लिए बड़ा समाधान मान रहे हैं। फिलहाल यह तकनीक छोटे स्तर की कूलिंग में ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है। यह भविष्य की सस्टेनेबल कूलिंग का सबसे किफायती और प्रभावी विकल्प साबित होगा।
