Narayana Murthy के बयान पर फिर से छिड़ा बवाल! भारतीयों को हर हफ्ते 72 घंटे काम करने की सलाह


Bhawna Mishra

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May 07, 2026


इंफोसिस के को-फाउंडर एन. आर. नारायण मूर्ति ने एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने हाल ही में 72 घंटे के वर्क वीक की वकालत की है। इतना ही नहीं, मूर्ति ने चीन के पॉपुलर ‘996’ वर्क मॉडल की भी जमकर तारीफ की। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। जहां कुछ लोग इसे देश की प्रोडक्टिविटी से जोड़ रहे हैं। वहीं कई लोग इसे सेहत के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं। फिलहाल, इस वर्क कल्चर को लेकर देशभर में काफी बहस हो रही है।

नारायण मूर्ति बयान पर फिर छेड़ी बहस

रिपब्लिक टीवी (Republic TV) को दिए एक इंटरव्यू में मूर्ति ने बड़ा बयान दिया। उनका मानना है कि भारत को ग्लोबल लेवल पर टक्कर देने के लिए मेहनती युवाओं की जरूरत है। उन्होंने चीन के मशहूर ‘9-9-6’ वर्क मॉडल का भी जिक्र किया। इस मॉडल में कर्मचारी सुबह 9 से रात 9 बजे तक काम करते हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 72 घंटे का वर्क वीक होता है।

क्या है चीन का 996 मॉडल?

हाल ही में, चीन में तेज आर्थिक विकास के दौर में ‘996’ वर्क कल्चर तेजी से लोकप्रिय हुआ। खासकर टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स में इसका चलन बढ़ा। इस मॉडल में कर्मचारियों से लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इस नियम के तहत कर्मचारी बहुत कम ब्रेक लेते हैं। उनका पूरा फोकस कंपनी की ग्रोथ और प्रोडक्टिविटी पर होता है। 

‘996 मॉडल’ पर क्यों बढ़ा विवाद?

भले ही यह मॉडल चीन में बहुत फेमस हुआ। हालांकि कुछ समय बाद इस सिस्टम को लेकर काफी आलोचना भी हुई। लंबे काम के घंटे से तनाव और बर्नआउट बढ़ा। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा। खास तौर पर लोगों की वर्क और पर्सनल लाइफ पर काफी प्रभाव पड़ा। कुछ मामलों में ज्यादा काम से मौत की खबरें भी सामने आई। 

जनता के गुस्से और ह्यूमन राइट्स को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया। साल 2021 में चीन की सुप्रीम पीपल्स कोर्ट ने ‘996’ सिस्टम को गैरकानूनी घोषित किया।

नारायण मूर्ति ने असल में क्या कहा?

नारायण मूर्ति का कहना है कि कड़ी मेहनत के बिना कोई देश ग्लोबल पावर नहीं बन सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम के प्रति समर्पण का उदाहरण दिया। मूर्ति के अनुसार, लोगों को पहले अपने करियर और देश के विकास पर ध्यान देना चाहिए। वर्क-लाइफ बैलेंस की चिंता बाद में की जा सकती है। दरअसल 2023 में भी उन्होंने 70 घंटे काम करने की सलाह दी थी। ऐसे में उनके इस नए बयान ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

इंटरनेट पर क्या रहा नेटिज़न्स का रिएक्शन?

नारायण मूर्ति का बयान इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया है। इस पर प्रोफेशनल्स और Gen Z यूज़र्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि भारतीय वर्क कल्चर में पहले ही कई समस्याएं हैं। कम सैलरी और टॉक्सिक वर्क कल्चर जैसी समस्याओं ने गुस्सा बढ़ा दिया है। यहां तक कि कर्मचारियों को ओवरटाइम का पैसा भी नहीं मिलता। लोगों ने पूछा कि जब चीन खुद इसे बैन कर चुका है। तो भारत में इस नियम को क्यों अपनाया जाए?

क्या है प्रोडक्टिविटी की असली परिभाषा?

इस विवाद ने भारत के कॉर्पोरेट और स्टार्टअप सेक्टर में बहस तेज कर दी है। कुछ बिजनेस लीडर्स का मानना है कि आर्थिक विकास के लिए लॉन्ग वर्किंग ऑवर जरूरी हैं। इससे ग्लोबल कम्पटीशन में बढ़त मिल सकती है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा काम का मतलब ज्यादा आउटपुट नहीं होता। प्रोडक्टिविटी के लिए इनोवेशन और सही वेतन कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ एफिशिएन्सी और हेल्दी वर्क एनवायरनमेंट भी जरूरी भूमिका निभाते हैं।

60- Words Summary:

इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने 72 घंटे काम करने की सलाह देकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने चीन के ‘996’ मॉडल की तारीफ की। उनके बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। कुछ लोग इसे प्रोडक्टिविटी से जोड़ रहे हैं। वहीं कई इसे सेहत के लिए खतरा बता रहे हैं। इस मुद्दे ने काम के घंटे और वर्क-लाइफ बैलेंस पर देशभर में चर्चा तेज कर दी है।


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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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