भारतीय रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में सभ्य व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत, पैसेंजर्स से अब खास अपील की गई है कि वे अपने फोन, टैबलेट और लैपटॉप का उपयोग करते समय हेडफ़ोन का इस्तेमाल करें। बोर्ड का कहना है कि तेज़ आवाज़ में बात करने या बिना इयरफ़ोन के ऑडियो/ वीडियो चलाने की शिकायतें बढ़ रही हैं। इससे बाकी यात्रियों को असुविधा होती है।

गैजेट्स के शोर से अब मिलेगा छुटकारा
पिछले कुछ सालों में ट्रेन में प्राइवेट गैजेट्स से शोर की समस्या बढ़ी है। हर हाथ में मौजूद मोबाइल और टैबलेट से निकलता शोर अक्सर विवाद का कारण बनता है। कॉल या म्यूजिक और कंटेंट स्ट्रीमिंग इसकी मुख्य वजह हैं। अक्सर पैसेंजर्स इन्हें स्पीकर्स पर चलाते है। ऐसे में रेलवे अधिकारियों ने सफर के दौरान होने वाली इस असुविधा को कम करने का फैसला लिया है। यही कारण है कि बोर्ड डिजिटल शिष्टाचार को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रहा है।
10 बजे बाद कोच में साइलेंस जरूरी
रेलवे ने रिजर्व्ड कोच में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ‘क्वाइट आवर्स’ का समय तय किया है। इस दौरान केबिन की मुख्य लाइटें बंद कर दी जाती है। कोच में सिर्फ हल्की नाइट लाइटें जलती रहती हैं। इस समय जोर से बात करना पूरी तरह मना होता है। यात्रियों से शांति बनाए रखने की अपील की जाती है। यह नियम सभी के लिए समान है। पैसेंजर हों या रेलवे स्टाफ, सभी को इसका पालन करना होता है। TTE और कैटरिंग स्टाफ कोई भी इससे बाहर नहीं हैं।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
ट्रेन में बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है। रेलवे अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। इस पहल का उद्देश्य साफ है। र यात्री को शांत और सुविधाजनक माहौल देना। रेलवे ने पैसेंजर्स से अपील की है कि शांति बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी से हेडफ़ोन का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। आवाज़ धीमी रखने की अपील की गई। हेडफ़ोन लगाएं और दूसरों की सुविधा का ध्यान रखें।
60- Word Summary:
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में शांति बनाए रखने के लिए नई पहल शुरू की है। पैसेंजर्स से हेडफ़ोन इस्तेमाल करने की अपील की गई है। तेज आवाज़ में बात करने और स्पीकर पर ऑडियो चलाने से परेशानी बढ़ रही थी। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ‘क्वाइट आवर्स’ लागू रहेंगे। नियम तोड़ने पर कार्रवाई हो सकती है। इस पहल से ट्रेन यात्रा का अनुभव पहले से बेहतर और शांत हो सकेगा।
