भारत में इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ₹12,000 करोड़ की नई इंसेंटिव स्कीम पर काम कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राइवेट ऑपरेटरों के बीच इलेक्ट्रिक बसों का चलन बढ़ाना है। इससे देश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में भारी निवेश आने की उम्मीद है। साथ ही, डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी और शहरों को प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी।

प्राइवेट बस ऑपरेटरों को मिलेगा फायदा
बता दें की इस बार सरकार का फोकस सरकारी कंपनियों के बजाय प्राइवेट ऑपरेटरों पर है। देश में ज्यादातर बसों का संचालन प्राइवेट ऑपरेटर ही करते हैं। ऐसे में इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा इन्हीं ऑपरेटरों को मिल सकता है।
नई स्कीम में क्या होगा खास?
इस योजना के तहत सरकार प्राइवेट मालिकों के लिए इलेक्ट्रिक बसें खरीदना आसान बनाएगी। इसके लिए ब्याज पर सब्सिडी, कैपिटल सपोर्ट और क्रेडिट गारंटी जैसे फायदे दिए जाएंगे। सरकार टोल टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भी छूट देने पर विचार कर रही है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य डीजल बसों के मुकाबले इलेक्ट्रिक बसों की भारी शुरुआती लागत को कम करना है। इससे प्राइवेट ऑपरेटर्स को कम पूंजी में बसें खरीदने में मदद मिलेगी।
सड़कों पर उतरेंगी 50 हजार इलेक्ट्रिक बसें
सरकार का लक्ष्य अगले 10 साल में करीब 50,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का है। अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना से प्राइवेट सेक्टर में ₹70,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक का भारी निवेश आ सकता है।
इससे ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी रफ्तार मिलेगी। इस स्कीम का सबसे ज्यादा फायदा स्कूल बस, स्टाफ बस, इंटरसिटी कोच और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज चलाने वाले ऑपरेटरों को होगा।
कैसे काम करेगी यह इंसेंटिव स्कीम?
इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए लोन पर 3% से 5% तक ब्याज सब्सिडी मिल सकती है। इससे फ्लीट मालिकों के लिए फाइनेंसिंग की कॉस्ट काफी कम हो जाएगी। इतना ही नहीं, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी लोन देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
सरकार चाहती है कि इलेक्ट्रिक बसें खरीदना आसान हो। साथ ही इनका संचालन भी लंबे समय में ज्यादा किफायती बने।
EV मिशन को मिलेगी नई रफ्तार
यह नई योजना सरकार की दूसरी EV योजनाओं के साथ मिलकर काम करेगी। PM e-Bus सेवा और PM E-DRIVE का मकसद भी देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। PM e-Bus सेवा के तहत शहरों में 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में अभी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या कई देशों के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में इस सेक्टर में तेजी से बढ़ने की अच्छी संभावना है।
इलेक्ट्रिक बसों से होंगे कई बड़े फायदे
इलेक्ट्रिक बसें आने से सिर्फ प्रदूषण ही कम नहीं होगा, बल्कि महंगे ईंधन के आयात पर देश की निर्भरता भी घटेगी। इससे शहरों की एयर क्वालिटी में सुधार होगा। लोगों को स्वच्छ माहौल मिलेगा। साथ ही, घरेलू ईवी निर्माताओं, बैटरी सप्लायर्स और चार्जिंग कंपनियों के लिए कमाई के बड़े मौके बनेंगे।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह योजना भारत के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तस्वीर बदल देगी। इसके अलावा, यह कदम देश के बड़े क्लाइमेट गोल्स को पूरा करने में भी मददगार साबित होगा।
ग्रीन मोबिलिटी की ओर महत्वपूर्ण कदम
अगर इस स्कीम को मंजूरी मिलती है, तो यह देश में कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे बड़ा इंसेंटिव होगा। प्राइवेट ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक बसें अपनाने के लिए प्रेरित करके सरकार स्वच्छ परिवहन को रफ्तार देना चाहती है। इस कदम से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा। बल्कि ऑटो सेक्टर में भारी इन्वेस्टमेंट आने की भी उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यह पहल भारत के ग्रीन मोबिलिटी के सपनों को सच करने में गेम चेंजर साबित हो सकती है।
60-Words Summary:
भारत में इलेक्ट्रिक बसों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ₹12,000 करोड़ की नई इंसेंटिव स्कीम पर काम कर रही है।इसका उद्देश्य प्राइवेट बस ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना से बड़े निवेश, कम प्रदूषण और साफ-सुथरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही देश की ग्रीन मोबिलिटी को भी नई रफ्तार मिलेगी
