जॉब के नाम पर फर्जीवाड़ा रोकने के लिए IT दिग्गज Infosys ने एक बड़ा एक्शन लिया है। कंपनी ने करीब 20,000 उम्मीदवारों का ऑनलाइन टेस्ट अचानक रोक दिया है। दरअसल, परीक्षा में किसी और के नाम पर परीक्षा देने (इम्पर्सनेशन) के मामले सामने आए हैं।

आइए समझते है क्या है ये पूरा मामला-
ऑनलाइन टेस्ट में सामने आई धोखाधड़ी
पिछले कुछ महीनों में इंफोसिस की भर्ती में काफी फर्जीवाड़ा हुआ है। मामले बढ़ते ही कंपनी ने तुरंत सख्त एक्शन लिया। इंटरनल रिव्यू में खुलासा हुआ कि ऑनलाइन टेस्ट में बड़े पैमाने पर चीटिंग हुई। कई कैंडिडेट्स ने खुद असेसमेंट देने के बजाय किसी और को बैठाया।
वहीं, कुछ लोगों ने चीटिंग के दूसरे तरीके अपनाए। इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा कंपनी के इंटरनल रिव्यु में हुआ है।
इस बीच हजारों कैंडिडेट्स का ऑनलाइन टेस्ट फिलहाल रोक दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू होने के बाद ही असेसमेंट दोबारा शुरू किया जाएगा।
डिजिटल हायरिंग के साथ बढ़ीं नई चुनौतियां
डिजिटल हायरिंग के बढ़ते चलन ने रिक्रूटमेंट प्रोसेस को काफी आसान बना दिया है। हालांकि, इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। हायरिंग के दौरान अब धोखाधड़ी के नए और हाई-टेक तरीके देखने को मिल रहे हैं।
टेक कंपनियों को AI की मदद से होने वाली चीटिंग से निपटना पड़ रहा है। यही नहीं, रिमोट टेस्ट में कई कैंडिडेट्स किसी और से असेसमेंट दिलवा रहे हैं। वहीं, कई मामलों में बाहरी मदद लेने की बात भी सामने आई है।
AI टूल्स ने बढ़ाई मुश्किल
HR एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई तकनीकों ने ऑनलाइन टेस्ट में चीटिंग को आसान बना दिया है। AI टूल्स, स्क्रीन-शेयरिंग टेक्नोलॉजी और रिमोट कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है।
इससे फेक कैंडिडेट्स के लिए ऑनलाइन असेसमेंट में हेरफेर करना पहले के मुकाबले आसान हो गया है।
AI और फेस रिकग्निशन से बढ़ेगी निगरानी
ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए इंफोसिस नए और कड़े नियम ला रही है। कंपनी अब कैंडिडेट्स का वेरिफिकेशन बहुत सख्ती से करेगी। इसके लिए फेशियल रिकग्निशन और एडवांस्ड प्रॉक्टरिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।
साथ ही, टेस्ट के समय कैंडिडेट्स के बिहेवियर पर नज़र रखी जाएगी। साथ ही फ्रॉड रोकने के लिए नया AI-पावर्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम भी तैयार हो रहा है।
प्रैक्टिकल स्किल्स पर होगा फोकस
Infosys अब अपने असेसमेंट डिज़ाइन को पूरी तरह अपग्रेड करने की तैयारी में है। यह नया टेस्ट सिस्टम प्रैक्टिकल स्किल्स पर फोकस करेगा। इससे कैंडिडेट्स की स्किल्स का सही पता चल सकेगा। साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी और नकल की गुंजाइश भी बहुत कम हो जाएगी।
इंफोसिस जॉब्स पर नहीं लगेगा कोई ब्रेक
बता दें कि ऑनलाइन असेसमेंट पर रोक के बावजूद इंफोसिस में रिक्रूटमेंट प्रोसेस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल कंपनी हायरिंग योजनाओं में कोई बदलाव नहीं किया है। फ्रेशर्स और एक्सपीरिएंस्ड कैंडिडेट्स की हायरिंग पहले की तरह जारी रहेगी।
आज मार्केट में क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी की बहुत डिमांड है। ऐसे में, कंपनी को AI और डिजिटल प्रोजेक्ट्स के लिए लगातार नए लोगों की ज़रूरत है।
वेरिफिकेशन टेक्नोलॉजी पर बढ़ा फोकस
यह मामला आईटी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आजकल वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन असेसमेंट का चलन बहुत बढ़ गया है। ऐसे में कंपनियों के लिए सही और ईमानदार उम्मीदवार चुनना एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
रिक्रूटमेंट प्रोसेस को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यही वजह है कि कई बड़ी कंपनियां अब एडवांस्ड वेरिफिकेशन टेक्नोलॉजी पर इनवेस्ट कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नौकरी केवल टैलेंटेड कैंडिडेट्स को ही मिले।
60-Words Summary:
इंफोसिस ने 20,000 उम्मीदवारों की परीक्षा रोक दी है। ऑनलाइन टेस्ट में बड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। जांच में इम्पर्सनेशन और चीटिंग के कई मामले सामने आए। HR एक्सपर्ट्स के अनुसार, AI और डिजिटल टूल्स से धोखाधड़ी आसान हो गई है। कंपनी अब फेशियल रिकग्निशन और AI-बेस्ड सिस्टम से वेरिफिकेशन मजबूत करेगी। इस रोक से नौकरियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। डिजिटल और साइबर सिक्योरिटी के लिए हायरिंग पहले की तरह जारी रहेंगी।
