भारत के कई शहरों में गिग वर्कर्स विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में हुई हड़ताल में ऐप-बेस्ड डिलीवरी और राइड-हेलिंग सर्विसेज के वर्कर्स शामिल हुए थे। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 60% गिग वर्कर्स ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया। इसमें फूड डिलीवरी, ग्रोसरी डिलीवरी और कैब सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल थे। वर्कर्स ज्यादा सैलरी, कम कटौती और काम में बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

इंसेंटिव में बदलाव पर उठे सवाल
गिग वर्करों ने घटती कमाई को लेकर नाराजगी जताई है। यूनियनों का कहना है कि ईंधन की कीमतें, महंगाई और काम का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन डिलीवरी एग्जीक्यूटिव और ड्राइवरों की आमदनी कम हो रही है। उनका आरोप है कि कई प्लेटफॉर्म्स ने इंसेंटिव सिस्टम में बदलाव किए हैं।
इससे हर ऑर्डर पर मिलने वाली इनकम में कमी आई है। साथ ही कम समय में ज्यादा डिलीवरी का दबाव भी बढ़ा है। मज़दूर संगठनों का कहना है कि कमीशन और जुर्माने की वजह से ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स की बचत पर सीधा असर पड़ रहा है।
कई बड़े शहरों में डिलीवरी और ऐप-कैब सेवाएं ठप
देश के कई बड़े शहरों में कल मजदूरों की हड़ताल से जनजीवन पर असर पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता जैसे महानगरों के एम्प्लॉई शामिल हुए। पीक आवर्स में ऐप-बेस्ड टैक्सी और डिलीवरी सर्विस पर असर पड़ा।
जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेबर यूनियन का दावा है कि इस हड़ताल में लगभग 60% वर्कर्स ने हिस्सा लिया। हालांकि, कंपनियों ने अभी तक इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सामाजिक सुरक्षा को लेकर आंदोलन तेज
देश में गिग वर्कर अब सुरक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर खुलकर आवाज उठा रहे हैं। इन कर्मचारियों की मुख्य डिमांड एक्सीडेंटल और हेल्थ इंश्योरेंस की है। साथ ही, रिटायरमेंट बेनिफिट्स और मिनिमम वेज गारंटी का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।
इसके अलावा, ट्रांसपेरेंट पेमेंट सिस्टम लागू करने की मांग की जा रही है। इस समय भारत में फ़ूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, मोबिलिटी और हाइपरलोकल सर्विस का मार्केट तेजी से ग्रो कर रहा है। ऐसे में इस सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए यह मुद्दा काफी अहम बन गया है।
लाखों वर्करों की आजीविका पर सवाल
बता दें कि गिग वर्कर्स के लिए सरकारी नीतियां बनाई जा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारें इस पर चर्चा कर रही हैं। कुछ राज्यों ने वेलफेयर बोर्ड बनाने का फैसला किया है। जहां एक ओर, इस बोर्ड के माध्यम से वर्कर्स के लिए नई योजनाएं आ सकती हैं।
वहीं दूसरी तरफ, श्रमिक संगठन मजबूत कानून की मांग कर रहे हैं। वे जॉब सिक्योरिटी की मांग पर अड़े हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह चर्चा अब बहुत जरूरी है। देश के लाखों परिवार इन्हीं नौकरियों पर निर्भर हैं।
कॉस्ट कटिंग पर कंपनियों का बढ़ा फोकस
टेक और डिलीवरी कंपनियां प्रॉफिट बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। वे अपनी कॉस्ट कम करने पर ध्यान दे रही हैं। वहीं पहले कंपनियां डिस्काउंट देकर आगे बढ़ रही थीं। हालांकि अब इस स्ट्रेटेजी में बदलाव आया है। मार्केट में बहुत तेजी से कम्पटीशन बढ़ गया है। इन्वेस्टर्स का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में कंपनियों ने कई बदलाव किए हैं। अब इंसेंटिव और डिलीवरी चार्ज बदल गए हैं। कमीशन सिस्टम को भी अपडेट किया गया है। कंपनियों के अनुसार ये बदलाव जरूरी हैं।
मांगें न मानने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
इस मामले में लेबर यूनियन ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की तैयारी है। वेतन, इंसेंटिव और सुरक्षा पर बात न बनने पर देश भर में हड़ताल भी हो सकती है। मजदूर संगठनों ने इसके साफ संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और बड़ा होगा।
कुछ दिनों में इसमें देश के अन्य शहरों के वर्कर्स भी शामिल होंगे। इसके अलावा, गिग इकॉनमी से जुड़े कई शहर और क्षेत्र के लोग भी इस आंदोलन से जुड़ सकते हैं।
60- Words Summary:
भारत के कई शहरों में गिग वर्कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे बेहतर सैलरी और कम कटौती की मांग कर रहे हैं। हाल की हड़ताल में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहर शामिल रहे। यूनियनों का कहना है कि कमाई घट रही है। वही इंसेंटिव सिस्टम बदला गया है। फिलहाल सरकार इन पॉलिसी पर चर्चा कर रही है। कंपनियां कॉस्ट कटिंग कम करने पर ध्यान दे रही हैं। मांगें न माने जाने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
