OpenAI को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल हाल ही में CEO सैम ऑल्टमैन ने माना है कि ChatGPT में एक कमी है। कोडिंग में एक्सपर्ट होने के बावजूद, समय बताने के मामले में यह AI अभी थोड़ा पीछे है। ऑल्टमैन के बताया, ChatGPT अभी भी सटीक तरीके से समय को ट्रैक नहीं कर पाता। हैरानी की बात यह है कि इतना एडवांस होने के बाद भी यह एक साधारण टाइमर की तरह काम नहीं कर सकता।

आखिर कहां चूक रहा है ChatGPT?
पहली नज़र में यह बहुत मामूली लग सकता है। लेकिन असल मुद्दा समय बताने का नहीं है। दरअसल समस्या बीते हुए समय को सही तरीके से ट्रैक करने की है। जैसे कि टाइमर शुरू करना। किसी काम में कितना समय लगा, यह ट्रैक करना। एक फिक्स्ड टाइम के बाद यूज़र्स को नोटिफ़ाई करना। इन्हीं कुछ मामलों में ChatGPT लड़खड़ाता नजर आता है। टेस्ट में देखा गया कि गलत होने के बावजूद, समय ट्रैक करने का दावा करता है। हालांकि कई बार इसके नतीजे गलत पाए गए हैं।
ट्रैकिंग में क्यों कमजोर है ChatGPT?
ChatGPT की इस कमजोरी के पीछे इसके काम करने का तरीका है। दरअसल, यह मॉडल डेटा के पैटर्न को समझकर जवाब देता है। यह किसी सिस्टम क्लॉक या टाइमर की तरह काम नहीं करते। बिना किसी बाहरी टूल के, ये समय को ट्रैक करने के बजाय केवल अनुमानित जवाब देते हैं। सरल शब्दों में कहे तो, ChatGPT समय के बारे में जानकारी दे सकता है। लेकिन वह समय को सीधे तौर पर ट्रैक नहीं कर सकता।
AI वॉइस मॉडल सुधार में लगेगा एक साल
सैम ऑल्टमैन ने वॉइस मॉडल की कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने संकेत दिया कि इसे ठीक होने में समय लगेगा। उनके अनुसार, मौजूदा वॉइस मॉडल अभी टाइमर शुरू करने या उसे ट्रैक करने में सक्षम नहीं हैं। यह एक टेक्निकल इश्यू है। जिस पर काम जारी है। ऑल्टमैन का कहना है कि इस समस्या को पूरी तरह हल करने में करीब एक साल लग सकता है।
AI को अभी और सुधार की जरूरत
AI सिस्टम की चुनौती काफी बड़ी है। यह दिखने में बहुत एडवांस्ड है। लेकिन असली काम करने में पीछे है। यह कभी-कभी पूरे भरोसे से गलत जवाब दे देता है। इससे लोगों का ट्रस्ट कम हो सकता है। टाइमर जैसे आसान काम भी AI के लिए मुश्किल हो सकते हैं। इसके लिए उसे अलग-अलग टूल्स की जरूरत पड़ती है। AI की बातों और उसकी असली क्षमता में काफी अंतर है।
AI की तरक्की हर क्षेत्र में बराबर नहीं
AI कोडिंग और एनालिसिस जैसे कठिन काम अच्छे से कर लेता है। लेकिन यह कमी एक अलग सच्चाई दिखाती है। AI हर काम में एक जैसा अच्छा नहीं है। इसकी तरक्की हर जगह बराबर नहीं है। कई बार आसान काम भी इसके लिए मुश्किल हो जाते हैं। ये काम कठिन सोच से भी ज्यादा कठिन लग सकते हैं। ऐसे में AI का भविष्य इस बात पर निर्भर है कि वह लैंग्वेज इंटेलिजेंस और टूल्स को कैसे साथ लाता है।
60-Word Summary:
OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन ने ChatGPT की एक बड़ी कमी स्वीकार की है। यह AI समय को सही तरह ट्रैक नहीं कर पाता। इसका कारण है कि यह सिस्टम क्लॉक की तरह काम नहीं करता। यह केवल पैटर्न के आधार पर जवाब देता है। वॉइस मॉडल में सुधार में लगभग एक साल लग सकता है। कुल मिलाकर, AI अभी रियल वर्ल्ड टास्क्स के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
