AI पर बढ़ते खर्च के बीच Zoho ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने एम्प्लॉयीज की एनुअल सैलरी बढ़ाने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, कंपनी ने मार्केटिंग पर होने वाले खर्च में भी कटौती की है। इसकी वजह AI का बढ़ता खर्च और बिजनेस को लेकर अनिश्चित स्थिति है। Zoho के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने 13 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में जानकारी साझा की।
उन्होंने यह भी कहा कि सॉफ्टवेयर सेक्टर्स में जॉब को लेकर आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

चार गुना बढ़ीं सर्वर की कीमतें
Zoho को AI की बढ़ती कॉस्ट का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इन सर्वर का इस्तेमाल कंपनी के डेटा सेंटर चलाने के लिए होता है।
इसके अलावा, Zoho के प्रोडक्ट्स में AI का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। कंपनी अपने रोजमर्रा के कामों में भी AI का इस्तेमाल कर रही है। इससे कंप्यूटिंग और सर्वर पर होने वाला बजट बढ़ रहा है।
वेम्बू ने बताया कि कंपनी इन खर्चों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। इस बीच, सॉफ्टवेयर मार्केट में चुनौतियां बनी हुई हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे तनाव का असर भी बिजनेस पर पड़ रहा है।
ऐसे में, बढ़ती लागत के चलते Zoho अब अपने खर्च कम करने पर ध्यान दे रही है। कंपनी का फोकस यह तय करने पर है कि किन चीजों पर खर्च जारी रखना है और कहां कटौती की जा सकती है।
Zoho में इस साल नहीं बढ़ेगी सैलरी
AI की बढ़ती लागत के बीच Zoho ने कई सेक्टर्स में कॉस्ट कटिंग का फैसला लिया हैं। इसी के तहत, कंपनी ने इस साल कर्मचारियों की एनुअल सैलरी हाइक रोक दी है। कंपनी ने अपने एम्प्लॉयीज को इसकी जानकारी दे दी है।
हाल ही में, Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले के लिए माफी मांगी है। उन्होंने मुश्किल समय में कर्मचारियों के सहयोग के लिए उनका धन्यवाद भी किया।
कंपनी ने मार्केटिंग बजट में भी कटौती की है। इस तरह, Zoho अपना बजट मैनेज करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, Zoho ने बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान नहीं किया है। वेम्बू ने सुनिश्चित किया है कि कंपनी ज्यादा से ज्यादा नौकरियां बचाने की कोशिश करेगी।
Zoho ने डेढ़ साल से क्यों नहीं बढ़ाई टीम?
बता दें की Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपनी टीम में नए लोगों को ऐड नहीं किया है। कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने यह जानकारी साझा की है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से सॉफ्टवेयर सेक्टर में नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। AI टूल अब कोड लिखने और कई काम अपने आप करने में सक्षम हैं। पहले इन कामों के लिए इंसानों की जरूरत होती थी।
AI की मदद से यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से ऐप भी बना सकते हैं। इससे कुछ सॉफ्टवेयर कंपनियों के प्रोडक्ट्स की डिमांड पर असर पड़ सकता है। वेम्बू ने सॉफ्टवेयर सेक्टर में जॉब्स के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है।
अगले 3 से 5 साल में Zoho के सामने बड़ी चुनौती
बताते चलें कि Zoho अब अपने बिजनेस में बदलाव कर रही है। कंपनी को फिलहाल कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, अगले 3 से 5 साल कंपनी के लिए बेहद अहम होंगे। इस दौरान कंपनी को अपने बिजनेस को नई जरूरतों के हिसाब से ढालना होगा।
Zoho के सामने सबसे बड़ी चुनौती कॉस्ट कटिंग करना होगा। कंपनी को अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी बनाए रखनी है। साथ ही, AI की मदद से काम तेज करने हैं, ताकि खर्च ज्यादा न बढ़े।
AI के दौर में कंपनियों के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। उन्हें बेहतर AI प्रोडक्ट्स बनाने हैं। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित करना है कि इनके इस्तेमाल में ज्यादा पैसा खर्च न हो।
60-Words Summary:
Zoho ने एनुअल सैलरी इन्क्रीमेंट रोक दिया है। कंपनी ने मार्केटिंग कॉस्ट में भी कटौती की है। इसकी वजह AI और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती लागत है। फाउंडर श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना बढ़ गई हैं। AI का इस्तेमाल भी महंगा पड़ रहा है। कंपनी ने पिछले 18 महीनों से नई हायरिंग नहीं की है। वेम्बू ने अगले तीन से पांच साल को कंपनी में बदलाव के लिए अहम बताया है।
