Uber को ड्राइवरों से जुड़े मामलों में बड़ा झटका लगा है। डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने Uber पर €825 मिलियन का भारी जुर्माना लगाया है। इंडियन रुपीज में यह अमाउंट करीब ₹9,000 करोड़ है। यह कार्रवाई Uber द्वारा ड्राइवरों को सस्पेंड और डीएक्टिवेट करने के तरीके को लेकर की गई है। रेगुलेटर ने कंपनी के ऑटोमेटेड सिस्टम के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
रेगुलेटर के मुताबिक, Uber ने कुछ मामलों में ड्राइवरों के खिलाफ ऑटोमेटेड फैसले लिए। ऐसे फैसलों से ड्राइवर प्लेटफ़ॉर्म का एक्सेस खो सकते थे। इतना ही नहीं, इसका असर उनकी कमाई पर भी पड़ सकता था।

Uber के AI सिस्टम पर क्यों उठे सवाल?
बता दें यह मामला Uber के उन ऑटोमेटेड सिस्टम से जुड़ा है। जिनका इस्तेमाल 2018 से 2022 के बीच किया गया था। इन सिस्टम की मदद से ड्राइवरों के सस्पीशियस बिहेवियर का पता लगाया जाता था।
Uber का यह सिस्टम इस कई तरह की गतिविधियों पर नजर रखता था। इनमें किराया बढ़ाने से लेकर जानबूझकर लंबा रास्ता लेना भी शामिल था। सिस्टम उन मामलों की भी पहचान करता था। जहां ड्राइवर राइड पूरी करने के इरादे के बिना ही ट्रिप एक्सेप्ट कर लेते थे।
इस इवैल्यूएशन के आधार पर कई ड्राइवरों को टेम्पररी रूप से सस्पेंड कर दिया गया। अथॉरिटीज इस बात को लेकर चिंतित थे कि ऐसे ऑटोमेटेड फैसलों से ड्राइवरों की इनकम पर गंभीर असर पड़ सकता है।
Uber मामले में GDPR नियम क्यों अहम?
GDPR नियम लोगों को ऑटोमेटेड फैसलों से बचाते हैं। इस नियम के पीछे यूरोप का एक लॉ है। इसे GDPR कहा जाता है। यह ऑटोमेटेड फैसलों को कंट्रोल करता है।
इन नियमों के मुताबिक, कंपनियां हर फैसला सिर्फ अपने सिस्टम के भरोसे नहीं ले सकतीं। यह तब लागू होता है जब इन फैसलों का असर इंसानों पर बहुत गहरा पड़े।
आम तौर पर लोगों को कुछ अधिकार मिलते हैं। फैसले लेने की प्रक्रिया में ह्यूमन इंटरवेंशन होना चाहिए।
इसके अलावा, प्रभावित लोगों को फैसले के खिलाफ आवाज उठाने का मौका मिलना चाहिए। डच रेगुलेटर का कहना था कि Uber इन नियमों का पालन नहीं करता था।
Uber ड्राइवरों की कमाई पर क्या असर?
यह मामला ड्राइवरों के लिए भी अहम है। दरअसल कई ड्राइवर कमाई के लिए Uber पर निर्भर हैं। अगर उनका अकाउंट सस्पेंड हो जाए, तो कमाई रुक सकती है। डीएक्टिवेट होने पर भी ऐसा हो सकता है।
अथॉरिटीज का कहना है कि ऐसे फैसले सिर्फ सिस्टम पर नहीं छोड़े जाने चाहिए। इन फैसलों की इंसान को भी जांच करनी चाहिए।
यह केस गिग-इकोनॉमी में AI के इस्तेमाल पर सवाल उठाता है। AI बहुत सारी जानकारी तेजी से प्रोसेस करता है। यह कम समय में फैसले लेता है। लेकिन AI से गलती भी हो सकती है। ऐसे फैसलों का सीधा असर वर्कर्स पर पड़ सकता है। उनकी नौकरी या कमाई जा सकती है।
Uber ने सस्पेंशन प्रक्रिया पर दी सफाई
Uber ने रेगुलेटर के नतीजों को खारिज किया है। कंपनी ने जुर्माने को जरूरत से ज्यादा बताया है। कंपनी का कहना है कि उनके सिस्टम में ह्यूमन इंस्पेक्शन भी किया जाता है। जिसके बाद, ड्राइवर को सस्पेंशन के खिलाफ शिकायत करने का मौका भी मिलता है।
कंपनी के मुताबिक, फ्रॉड के मामलों में ज्यादातर सस्पेंशन कुछ समय के लिए होते हैं। किसी ड्राइवर को हमेशा के लिए डीएक्टिवेट करने से पहले इंसान फैसले की रिव्यू करते है।
ऐसे में Uber इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी। जिसके बाद यह विवाद आगे भी जारी रह सकता है।
इस फैसले से कितने ड्राइवर हुए प्रभावित?
रेगुलेटर ने पूरे यूरोप में ड्राइवरों से जुड़े ऑटोमेटेड फैसलों की जांच की। Uber का कहना है कि स्थायी रूप से प्रभावित ड्राइवरों की संख्या कम थी।
कंपनी के मुताबिक, 2021 में कम कस्टमर रेटिंग की वजह से यूरोप में 126 ड्राइवर डीएक्टिवेट हुए थे।
हालांकि, Uber इस बात से सहमत नहीं है कि इन डीएक्टिवेशन के पीछे उसका ऑटोमेटेड सिस्टम था। यही वजह है कि Uber की अपील में यह मुद्दा सबसे अहम रहने वाला है।।
AI के फैसलों पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। कंपनियों को AI के जरिए फैसले लेने चाहिए या नहीं। AI इंसानों से कहीं तेजी से जानकारी प्रोसेस कर सकता है। यह सस्पिशियस एक्टिविटीज़ को भी जल्दी पकड़ सकता है।
लेकिन कुछ फैसलों का असर सीधे लोगों पर पड़ता है। इससे उनकी जॉब प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में अथॉरिटीज ह्यूमन इंटरवेंशन को जरूरी मानती हैं।
Uber के लिए यह जुर्माना बड़ा झटका है। लेकिन इसका असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रह सकता। दूसरी टेक कंपनियां भी इससे सीख ले सकती हैं। खासकर वे कंपनियां जो लोगों से जुड़े फैसलों को AI के जरिए ऑटोमेट कर रही हैं।
