Old Monk पर बैन से महाराष्ट्र को ₹350 करोड़ का नुकसान! कंपनी ने कोर्ट में क्या दलील दी?


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Oct 14, 2026


महाराष्ट्र में ओल्ड मॉनक रम की बिक्री रोकने से करोड़ों का नुकसान होने का मामला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया गया कि इस रोक के चलते राज्य को करीब ₹350 करोड़ के एक्साइज़ रेवेन्यू का नुकसान हुआ। वहीं, रम बनाने वाली कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड ने ₹500 करोड़ से ज्यादा के बिजनेस नुकसान का दावा किया है। इस बीच, कंपनी ने FSSAI के रोक लगाने वाले आदेश को चुनौती दी है।

दरअसल, यह विवाद Old Monk के फ़ॉर्मूलेशन और लेबलिंग से जुड़ा है। रेगुलेटर ने इसमें इस्तेमाल होने वाली रम फ्लेवरिंग पर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि अगर इसमें अतिरिक्त रम फ्लेवरिंग मिक्स की जाती है, तो क्या इसे सिर्फ ‘रम’ के नाम से बेचा जा सकता है?

Old Monk के लेबल पर क्यों उठे सवाल?

बता दें कि महाराष्ट्र के खोपोली में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के निरीक्षण के बाद यह मामला सामने आया। अगस्त में FSSAI ने स्पिरिट में अतिरिक्त रम फ्लेवरिंग के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी।

रेगुलेटर के मुताबिक, हर फ्लेवर्ड स्पिरिट को सिर्फ ‘रम’ के नाम से नहीं बेचा जा सकता। इसके लिए तय मानकों को पूरा करना जरूरी है। FSSAI चाहता है कि ऐसे प्रोडक्ट पर ‘रम जैसा’ (Rum-like) या फ्लेवर्ड स्पिरिट का सही लेबल लगाया जाए।

FSSAI ने Old Monk के लेबल पर लिखे कुछ शब्दों पर भी सवाल उठाए हैं। इनमें ‘7 साल पुरानी ब्लेंडेड’ और ‘बहुत पुरानी वैटेड’ जैसे क्लेम शामिल हैं। रेगुलेटर का मानना है कि इससे यूजर्स को प्रोडक्ट लुक और डिज़ाइन को लेकर गलतफहमी हो सकती है।

₹500 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का दावा

बॉम्बे हाई कोर्ट में कंपनी की ओर से सीनियर वकील वेंकटेश धोंड पेश हुए। उन्होंने चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच को बताया कि सेल पर बैन से कंपनी को ₹500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

कंपनी ने यह भी दावा किया कि इस रोक से महाराष्ट्र सरकार को करीब ₹350 करोड़ के एक्साइज़ रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। कंपनी के मुताबिक, यही फॉर्मूला उसकी दूसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में भी इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में, सिर्फ खोपोली यूनिट पर रोक लगाने को लेकर उसने सवाल उठाए हैं।

कंपनी ने कोर्ट को यह भी बताया कि रोक के कारण करीब 300 कर्मचारी खाली बैठे हैं।

हालांकि, ये आंकड़े कंपनी की ओर से कोर्ट में पेश किए गए दावे हैं। फिलहाल कुछ भी प्रूव नहीं हुआ है।

‘Rum’ या ‘Rum-Like’ लेबलिंग पर विवाद

रेगुलेटर का कहना है कि प्रोडक्ट के लेबल पर उसके फॉर्मूलेशन की सही जानकारी होनी चाहिए। अधिकारियों की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट को बताया कि कंपनी अगर लेबल पर ‘Rum’ की जगह ‘Rum-Like’ लिखती है। तो सेल की अनुमति दी जा सकती है।

हालांकि, कंपनी ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं।कंपनी का कहना है कि नियम न्यूट्रल स्पिरिट में अप्रूव्ड एडिटिव्स के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं। कंपनी ने यह भी दावा किया कि दूसरी कंपनियां भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाती हैं। इसके बावजूद, उन पर ऐसे कोई रिस्ट्रिक्शन नहीं लगाए जाते।

इस बीच, कंपनी ने पहले बदले हुए लेबल भी पेश किए थे। इनमें ऐज से जुड़े कंट्रोवर्शियल क्लेम हटा दिए गए थे। साथ ही, ‘Added Flavour’ की जानकारी भी साफ तौर पर दी गई थी। लेकिन रेगुलेटर ने इन लेबल को भी अप्प्रूव नहीं किया।

23 अक्टूबर को फिर होगी मामले की सुनवाई

बताते चलें कि बॉम्बे हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को करेगा। इस दौरान Old Monk की सेल रिस्ट्रिक्शन और कंपनी के चैलेंजेज पर चर्चा होगी।

यह मामला शराब की कैटेगरी और लेबलिंग से जुड़े नियमों पर सवाल उठाता है। क्या फ्लेवर वाली स्पिरिट को ‘रम’ के नाम से बेचा जा सकता है? यही इस विवाद का मुख्य मुद्दा है।

कोर्ट के फैसले का असर कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स पर पड़ सकता है। इससे महाराष्ट्र सरकार का एक्साइज़ रेवेन्यू  भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, कोर्ट ने मामले पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है

60-Words Summary:

महाराष्ट्र में Old Monk की बिक्री पर रोक का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। कंपनी ने ₹500 करोड़ से ज्यादा के कारोबारी नुकसान का दावा किया है। वहीं, राज्य को ₹350 करोड़ के एक्साइज रेवेन्यू का नुकसान होने की बात कही है। विवाद रम की फ्लेवरिंग और लेबलिंग को लेकर है। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।


Bhawna Mishra
Bhawna Mishra
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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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