Amazon में एक बार फिर लेऑफ की खबर सामने आई है। कंपनी ने दुनियाभर में करीब 1,000 जॉब्स में कटौती की है। इस छंटनी में भारत, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा कटौती Amazon के ‘स्टोर्स’ बिजनेस में हुई है। जो कंपनी के ई-कॉमर्स कारोबार से जुड़ा है।
इस रिपोर्ट के बाद Amazon में छंटनी की खबर एक बार फिर चर्चा में है। 8 अक्टूबर 2026 को एम्प्लॉयीज को इस संबंध में सूचना दी गई। कंपनी ने आगे बताया कि इस फैसले से 1,000 से भी कम कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

Amazon की कौन-सी टीमें हुई प्रभावित?
Amazon के स्टोर्स बिजनेस के कई डिपार्टमेंट में कर्मचारियों की संख्या घटाई गई है। इनमें कस्टमर सर्विस, सेलिंग पार्टनर सर्विसेज, मार्केटप्लेस सपोर्ट और इंजीनियरिंग टीमें शामिल हैं।
इस फैसले से अमेरिका के अलावा भारत और UK के कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस देश या विभाग में कितने लोगों की नौकरी गई है।
Amazon के मुताबिक, यह बदलाव बिजनेस प्रायरिटीज़ को ध्यान में रखकर किए गए हैं। कंपनी ने आगे बताया है कि वह समय-समय पर अपनी टीम को रिव्यू करती है।
Amazon में छंटनी के पीछे क्या है वजह?
दरअसल Amazon के लेटेस्ट लेऑफ को रीस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम से जोड़कर देखा जा रहा है। यह प्रोग्राम 2025 के आखिर में शुरू हुआ था और 2026 की शुरुआत तक जारी रहा।
इस दौरान कंपनी ने करीब 30,000 कॉर्पोरेट पोस्ट में कटौती की थी। Amazon ने यह कदम कॉस्ट कम करने, मैनेजमेंट लेवल कम करने और इफेक्टिव वर्कफ़्लो बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इस लेऑफ से संकेत मिलता है कि कंपनी अपने ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर में बदलाव जारी रखे हुए है। हालांकि, Amazon ने यह साफ नहीं किया है कि यह लेऑफ पहले से ऐलान की गई 30,000 जॉब्स की कटौती से अलग है या उसी का हिस्सा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, छंटनी के बाद कर्मचारियों ने सेवरेंस पैकेज, नोटिस पीरियड और जॉब्स ऑप्शंस को लेकर सवाल पूछे। एम्प्लॉयीज ने यह भी पूछा कि वे कब तक कंपनी के सिस्टम इस्तेमाल कर सकेंगे।
AI पर बड़ा इन्वेस्टमेंट कर रही है Amazon
Amazon आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में अपना निवेश बढ़ा रही है। इसी के साथ कंपनी अपने वर्कफोर्स में भी बदलाव कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Amazon 2026 में करीब 220 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है।
बताया जा रहा है कि इसका बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर, चिप्स और क्लाउड कंप्यूटिंग पर खर्च हो सकता है। इससे AI से जुड़े कामों को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वर्कफोर्स में कटौती और AI पर बढ़ते खर्च के बीच टेक इंडस्ट्री में बदलाव साफ नज़र आ रहा है। कई कंपनियां कुछ सेक्टर्स में कॉस्ट कम कर रही हैं। जबकि AI और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश कर रही हैं।
हालांकि, Amazon के इस ले ऑफ को सीधे AI से जोड़ना सही नहीं होगा। कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि बिजनेस ट्रेंड्स के हिसाब से टीमों में ये बदलाव किए हैं।
AI और क्लाउड कंप्यूटिंग में जारी है हायरिंग
Amazon में जॉब कट्स के बीच कुछ खास क्षेत्रों में हायरिंग भी जारी है। इनमें Amazon Web Services (AWS), मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी टीमें शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने कुछ एक्स एम्प्लॉई से भी संपर्क किया है। साथ ही, उन्हें नई वैकेंसी के बारे में जानकारी दी गई है।
इससे संकेत मिलता है कि Amazon हर डिपार्टमेंट में एक जैसे बदलाव नहीं कर रही है। कंपनी अब उन क्षेत्रों में हायरिंग पर ज्यादा फोकस दे रही है। जिन्हें भविष्य के बिजनेस और टेक्नोलॉजी प्लान के लिए अहम माना जा रहा है।
लेऑफ के बीच कैसे तलाशें नए करियर के मौके?
Amazon में लेऑफ से टेक सेक्टर में नौकरी को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ऐसे में, एम्प्लॉयीज को दूसरी टीमों में नौकरी के मौके तलाशने पड़ सकते हैं। उन्हें अपनी स्किल्स बेहतर बनाने पर भी फोकस करना होगा। क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और AI इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नए मौके मिल सकते हैं।
वहीं, Amazon के लिए खर्च कम करना और जरूरी कर्मचारियों को बनाए रखना एक चुनौती होगी। कंपनी को अपने रिटेल, क्लाउड और AI बिजनेस की जरूरतों के बीच बैलेंस करना होगा।
