भारतीय शेयर मार्केट से फॉरेन इन्वेस्टर्स तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने 2026 में अब तक ₹3.08 लाख करोड़ विथड्रॉ कर लिए हैं। यह पिछले पूरे साल में निकाले गए ₹1.66 लाख करोड़ से लगभग दोगुना है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें, ग्लोबल टेंशन और महंगाई की चिंता इसकी प्रमुख वजहें हैं। वहीं, कंपनियों के फाइनेंशियल रिजल्ट्स को लेकर भी इन्वेस्टर्स सतर्क हैं।

भारतीय बाजार से क्यों दूरी बना रहे हैं FPIs?
मार्केट डिपॉजिटरी के डेटा के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने 25 अक्टूबर तक भारतीय शेयर मार्केट से ₹48,056 करोड़ निकाल लिए। यह आंकड़ा इंडियन मार्केट पर बढ़ते प्रेशर को दिखाता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स अब विकासशील देशों में अपने इन्वेस्टमेंट को लेकर ज्यादा लेकर दोबारा विचार कर रहे हैं।
शेयर मार्केट से दूरी, IPO में निवेश जारी
ग्लोबल इन्वेस्टर्स की बात करें तो 2026 में अब तक ₹3.08 लाख करोड़ का विथड्रावल किया है। यह 2025 में निकाले गए ₹1.66 लाख करोड़ से लगभग दोगुना है। विदेशी निवेशक पहले से लिस्टेड कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी लगातार कम कर रहे हैं। वही दूसरी ओर, IPO के जरिए वे भारतीय प्राइमरी मार्केट में निवेश जारी रखे हुए हैं।
‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, 12 अक्टूबर तक इन इन्वेस्टर्स ने सेकेंडरी मार्केट से ₹3.64 लाख करोड़ का फंड बाहर निकाला। वहीं, इसी दौरान प्राइमरी मार्केट में ₹56,485 करोड़ का इन्वेस्टमेंट आया।
ये डेटा बताता हैं कि फॉरेन इन्वेस्टर्स भारतीय बाजार से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं। इसके बजाय, वे अब इन्वेस्टमेंट के मामले में ज्यादा ऑप्शंस देख रहे हैं।
क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम और ग्लोबल टेंशन का असर
इसके अलावा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भी फॉरेन इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ा रही हैं। ऑयल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इससे रुपये पर दबाव आता है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहता है।
वहीं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट का माहौल और अनिश्चित बना दिया है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्टेड एनर्जी से पूरा करते हैं। ऐसे हालात से ज्यादा प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि फॉरेन इन्वेस्टर्स मार्केट में इन्वेस्ट करने से पहले इतना विचार कर रहे हैं।
इस बीच, महंगाई को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। रिपोर्ट में शामिल एक्सपर्ट्स के सर्वे के अनुसार, भारत की रिटेल इन्फ्लेशन रेट सितंबर में बढ़कर 5.6% रहने का अनुमान था। वही, अगस्त में यह 4.8% थी।
अमेरिकी बॉन्ड से मिल रहा बेहतर रिटर्न
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला बेहतर रिटर्न भी फॉरेन इन्वेस्टर्स का ध्यान खींच रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से डॉलर में निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो गया है। ऐसे में इन्वेस्टर्स इंडियन शेयर मार्केट से पैसा निकालकर अमेरिकी संपत्तियों का रुख कर रहे हैं।
दूसरी ओर, AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में आई तेजी ने निवेश के नए अवसर खोले हैं। मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, कुछ विदेशी फंड अब अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे मार्केट में इन्वेस्टमेंट बढ़ा रहे हैं। यहां AI से जुड़ी कंपनी, तेजी इन्वेस्टर्स को आकर्षित कर रही है।
इस बीच, रुपये की कमजोरी भी फॉरेन इन्वेस्टर्स के लिए एक और चुनौती है। जब वे भारतीय निवेश को वापस डॉलर में बदलते हैं, तो रुपये में गिरावट उनके रिटर्न को कम कर सकती है।
इस तरह, बेहतर रिटर्न और करेंसी में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।
डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स ने संभाला शेयर मार्केट
फॉरेन इन्वेस्टर्स की लगातार शेयर बेचने की वजह से बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, इंडियन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और रिटेल इन्वेस्टर्स की खरीदारी ने इस दबाव को कुछ कम किया है।
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार आने वाले पैसे और इंडियन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की खरीदारी ने बाजार में लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद की है। इसी सहारे भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के बड़ी मात्रा में पैसा निकालने के बावजूद टिका रहा है।
वहीं, फॉरेन इन्वेस्टर्स चुनिंदा IPO में इन्वेस्ट कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि शेयर बेचने का मतलब यह नहीं है कि इन्वेस्टर्स का भारत पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है।
भारतीय शेयर मार्केट का आगे क्या होगा?
भारतीय शेयर मार्केट की दिशा कई अहम फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। क्रूड ऑयल की प्राइस, ग्लोबल टेंशन, कंपनियों के फाइनेंशियल रिजल्ट्स और सेंट्रल बैंक के फैसले मार्केट की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अगर रुपया स्थिर रहता है और क्रूड ऑयल के दाम घटते हैं तो मार्केट सेंटिमेंट को सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और दूसरे देशों में बेहतर रिटर्न के मौके फॉरेन इन्वेस्टर्स के फैसलों को प्रभावित करते रहेंगे।
60-Words Summary:
विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। 2026 में अब तक वे ₹3.08 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। यह 2025 के पूरे साल के आंकड़े से लगभग दोगुना है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें, ग्लोबल तनाव और अमेरिकी बॉन्ड से बेहतर रिटर्न इसकी प्रमुख वजहें हैं। विदेशी निवेशक IPO में निवेश जारी रखे हुए हैं।
