फेस्टिव सीजन से पहले खाना पकाने के तेल की कीमतों को लेकर राहत की खबर है। सरकार ने पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर इम्पोर्ट ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। इसका असर आने वाले दिनों में ऑयल प्राइसेज पर दिख सकता है।
गौरतलब है कि त्योहारी सीजन में तेल की मांग बढ़ जाती है। घरों में मिठाइयां और स्नैक्स बनाए जाते हैं। वहीं, दुकानों और कारोबार में भी तले हुए खाने की तैयारी बढ़ जाती है। ऐसे में इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से कुकिंग ऑयल की कीमतों में कमी आ सकती है।

पाम सोयाबीन तेल पर ड्यूटी में 5% कटौती
सरकार ने कच्चे पाम तेल और कच्चे सोयाबीन तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 10% से घटाकर 5% कर दी है। यानी इन दोनों तेलों के इम्पोर्ट पर अब आधी ड्यूटी देनी होगी।
वहीं, रिफाइंड पाम तेल और रिफाइंड सोयाबीन तेल पर भी ड्यूटी घटाई गई है। इन पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% कर दी गई है।इस बदलाव से इम्पोर्ट किए जाने वाले खाने के तेल की लैंडेड कॉस्ट कम हो सकती है।
रिफाइंड तेलों पर भी टैक्स में बड़ी कटौती
इसके अलावा, सरकार ने पाम और सोयाबीन तेल पर ड्यूटी कम कर दी है। अब क्रूड पाम और सोयाबीन ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% की तुलना में सिर्फ 5% रह गई है। यानी इम्पोर्ट पर अब आधी ही ड्यूटी देनी होगी।
यही नहीं, रिफाइंड पाम और सोयाबीन तेल पर भी टैक्स कम कर दिया गया है। इन पर लगने वाली ड्यूटी को 32.5% से घटाकर 27.5% कर दिया गया है। इस बदलाव से विदेशों से इम्पोर्ट होने वाले ऑयल की कॉस्ट कम होगी। इसका सीधा असर जल्द ही घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिलेगा।
क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर अब जीरो इम्पोर्ट ड्यूटी
सरकार ने क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर सबसे बड़ी ड्यूटी कटौती की है। इसकी बेसिक कस्टम्स ड्यूटी अब पूरी तरह खत्म कर दी गई है। पहले कच्चे सूरजमुखी तेल पर 10% ड्यूटी लगती थी। अब यह शून्य हो गई है। यानी इसके इम्पोर्ट पर कोई बेसिक कस्टम्स ड्यूटी नहीं देनी होगी।
रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर भी ड्यूटी कम हुई है। इसकी बेसिक कस्टम्स ड्यूटी अब 32.5% की जगह 22.5% रहेगी।
कुकिंग ऑयल के लिए विदेशों पर निर्भर भारत
दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब दो-तिहाई वनस्पति तेल विदेशों से इम्पोर्ट है। यही वजह है कि घरेलू बाजार में कुकिंग ऑयल की कीमतें ग्लोबल मार्केट से प्रभावित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों के अलावा, फ्रेट कॉस्ट और करेंसी में उतार-चढ़ाव भी कीमतों पर असर डालते हैं।
पाम ऑयल की सप्लाई मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से होती है। वहीं, सोयाबीन और सनफ्लावर कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भारत में पहुंचते हैं।
ऐसे में इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से विदेशों से आने वाले ऑयल की कॉस्ट कम हो सकती है।
तेल की बढ़ती कीमतों पर सरकार का एक्शन
पिछले एक साल में खाने के तेल के दाम काफी बढ़ गए थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से रिफाइनर्स और ग्राहकों पर बोझ आ गया था। फेस्टिव सीजन से ठीक पहले यह दबाव और ज्यादा बढ़ गया था।
ऐसे में अब सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी घटा दि है। इससे कीमतें कंट्रोल में रहेंगी। साथ ही, खाने-पीने की चीजों की महंगाई रोकने में भी मदद मिलेगी।
फेस्टिव सीजन में कुकिंग ऑयल की डिमांड
त्योहारों की रौनक के बीच रसोई में तेल की डिमांड अचानक बढ़ जाती है। इस दौरान घरों में खरीदारी ज्यादा होती है। मिठाई बनाने वाले, रेस्टोरेंट और कैटरर्स भी अपना प्रोडक्शन बढ़ा देते हैं।
ऐसे में इम्पोर्ट की कम लागत से राहत मिल सकती है। हालांकि, रिटेल प्राइस पर इसका असर कई बातों पर निर्भर करेगा। इसमें इंटरनेशनल तेल की कीमतें, एक्सचेंज रेट, इन्वेंट्री, ढुलाई का खर्च और सप्लाई चेन शामिल हैं। यह देखना अहम होगा कि यह फायदा बाजार में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
इस ऑयल को मिल सकता है सबसे ज्यादा फायदा
नई ड्यूटी का सबसे ज्यादा फायदा सूरजमुखी के तेल को मिल सकता है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि कच्चे तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी खत्म होने से इसका इम्पोर्ट बढ़ सकता है।
इससे रिफाइनर्स को सनफ्लावर ऑयल इम्पोर्ट करने में ज्यादा दिलचस्पी हो सकती है। साथ ही, पाम और सोयाबीन तेल की जगह डिमांड इस ऑयल की ओर शिफ्ट हो सकती है।
60-Words Summary:
त्योहारी सीजन से पहले कुकिंग ऑयल की कीमतों पर राहत की उम्मीद बढ़ी है। सरकार ने पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई है। क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इससे इम्पोर्ट लागत कम हो सकती है। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिख सकता है। खासतौर पर सूरजमुखी तेल को इसका ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।रिटेल कीमतें कितनी घटेंगी, यह ग्लोबल कीमतों, सप्लाई और करेंसी रेट पर निर्भर करेगा।
