Unreserved Ticket Rule: डिजिटल टिकट के साथ अब फिजिकल कॉपी अनिवार्य, रेलवे ने जारी किए निर्देश


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Dec 21, 2025


इंडियन रेलवे ने अपने टिकट वेरिफिकेशन प्रोसेस में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब पैसेंजर्स के लिए UTS, ATVM या फिजिकल टिकट काउंटर से जारी किए गए। बिना रिजर्वेशन वाले टिकट की प्रिंटेड कॉपी साथ रखना ज़रूरी होगा। यह कदम डिजिटल फ्रॉड और टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया गया है।

पिछले कुछ समय से नकली टिकट बनाने में AI का इस्तेमाल बढ़ गया है। यह रूटीन चेकिंग के दौरान कई बार सामने आया है। इस डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए रेलवे ने नया कदम उठाया है। यह बदलाव बिना रिजर्वेशन वाले ट्रैवल टिकट की वैलिडेशन को और सख्त करेगा।

रेलवे क्यों कर रहा है फिजिकल टिकट अनिवार्य?

दरअसल रेलवे ने यह फैसला डिजिटल टिकट से बढ़ती सुरक्षा समस्याओं को देखते हुए लिया। अधिकारियों का मानना है कि AI टूल्स से टिकट के लेआउट, QR कोड और टिकट प्राइस को आसानी से कॉपी किया जा सकता है। 

रेलवे के मुताबिक, मोबाइल डिस्प्ले पर निर्भर होने से सुरक्षा में खामियां आई हैं। यह खामियां चेकिंग के दौरान आसानी से नहीं पकड़ पाई जातीं। खासकर भीड़भाड़ वाले रूट और कम दूरी की ट्रेनों में ऐसा अक्सर देखा जाता है।

इस घटना ने नियम बदलने पर किया मजबूर

बता दें कि यह मामला जयपुर रूट पर हुई एक इंसिडेंट के बाद सामने आया। टिकट-चेकिंग स्टाफ को कुछ स्टूडेंट मिले। जो मोबाइल टिकट लेकर ट्रेवल कर रहे थे। पहली नज़र में तो, टिकट सही लग रहे थे। QR कोड भी आसानी से स्कैन हो गए। यहां तक की ट्रेवल डिटेल्स भी मेल खा रहे थे।

जिसके बाद वेरिफिकेशन करने पर, ऑफिसर्स ने पाया कि टिकट AI-जनरेटेड थे। ये टिकट रिज़र्वेशन वाले टिकटों जैसा दिखने के लिए बनाए गए थे। इस घटना ने यह दिखाया कि कैसे डिजिटल हेरफेर, धोखाधड़ी का कारण बन सकता है।

मोबाइल टिकट पर सख्त जांच शुरू

मोबाइल टिकट की सुविधा होने के बावजूद, इन्हें AI टूल्स से आसानी से एडिट, कॉपी किया जा सकता है। जिसके चलते ऑन-बोर्ड स्टाफ के लिए असली और नकली टिकट में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। धोखाधड़ी में स्क्रीनशॉट, क्लोन किए गए QR कोड और बदले हुए टिकट फॉर्मेट आम हो गए हैं।

ऐसे में रेलवे अधिकारियों का मानना है कि प्रिंटेड टिकट से ऑडिट ट्रेल साफ़ रहता है। डुप्लीकेशन कम होता है और वेरिफिकेशन भी भरोसेमंद होता है।

किन टिकटों के लिए ज़रूरी है प्रिंटेड कॉपी?

नए नियम के मुताबिक, यात्रियों को प्रिंटेड टिकट रखना जरूरी होगा। अगर वे इन तरीकों से जारी अनरिजर्व्ड टिकट पर ट्रेवल कर रहे हैं-

– UTS मोबाइल ऐप

–  ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM)

–  फिजिकल टिकट काउंटर

यह नियम इन पर लागू नहीं होगा- 

–  रिजर्व्ड ई-टिकट

–  MT-CUT टिकट

AI फ्रॉड के खतरे के बीच रेलवे ने बढ़ाई सख्ती

नए नियमों के तहत अब सिर्फ मोबाइल टिकट दिखाना काफी नहीं होगा। बिना रिज़र्वेशन टिकट की प्रिंटेड कॉपी रखना भी जरूरी होगा। कॉपी न होने पर यात्री को बिना टिकट माना जा सकता है। डिजिटल फ्रॉड और AI के गलत इस्तेमाल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। रेलवे के अनुसार, फिजिकल वेरिफिकेशन सबसे भरोसेमंद तरीका है।

Summary:

इंडियन रेलवे ने टिकट जांच नियमों में बदलाव किया है। बिना रिजर्वेशन टिकट की प्रिंटेड कॉपी अब जरूरी होगी। यह नियम UTS, ATVM और काउंटर से लिए गए टिकटों पर लागू है। मोबाइल टिकट में AI से फ्रॉड के मामले बढ़े हैं। QR कोड और लेआउट आसानी से कॉपी हो रहे हैं। रेलवे ने इसके खिलाफ सख्त कदम उठाएं है। अब प्रिंटेड टिकट से जांच आसान होगी। फ्रॉड और अन्य स्कैम पर भी रोक लगेगी।


Bhawna Mishra
Bhawna Mishra
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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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