TCS में 90 दिनों में 11,151 कर्मचारियों का इस्तीफा, यूनियन ने मैनेजमेंट से मांगा जवाब! 


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Jan 15, 2026


टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कर्मचारियों की संख्या में तेज़ी से गिरावट आई है। Q3 FY26 में केवल तीन महीनों में 11,151 कर्मचारी बाहर हुए। इससे पहले क्वार्टर में भी 19,000 से ज्यादा कर्मचारियों की संख्या कम हुई थी। लगातार दो क्वार्टर में इतनी बड़ी कटौती IT इंडस्ट्री में चिंता का विषय बन गई है। इसे अब तक की सबसे बड़ी वर्कफोर्स गिरावट माना जा रहा है।

11,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी?

इस मामले पर TCS का कहना है कि यह कमी सिर्फ रूटीन एट्रिशन और ऑपरेशनल ऑप्टिमाइज़ेशन का हिस्सा है। लेकिन नेशनल इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज़ सेनेट (NITES) का कहना है कि स्थिति और गंभीर है। NITES के अनुसार, कई कर्मचारियों को फोर्स्ड रेजिग्नेशन देना पड़ा।

इसमें खासकर मिड-करियर और 10-20 साल एक्सपीरियंस वाले पुराने कर्मचारी शामिल हैं। कुछ के रोल वापस लिए गए। वही कई एम्प्लॉयीज पर परफॉर्मेंस प्रेशर के जरिए उन्हें बाहर किया गया। इन लेऑफ को अक्सर ‘वोलंटरी’ बताया जाता है। जिससे कंपनी लेऑफ से जुड़े कानूनी दाव-पेंचों से बच जाती है।

NITES के प्रेसिडेंट का बयान 

NITES के  प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह सलूजा ने भी अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि IT सेक्टर कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्हाइट-कॉलर कर्मचारी भी कानून के दायरे में आते हैं। बिजनेस के लिए कर्मचारियों के राइट्स से समझौता नहीं किया जा सकता। सलूजा के अनुसार, आर्थिक बदलाव हमेशा पारदर्शी और मानवीय होने चाहिए।

NITES ने इस मामले में लेबर कमिश्नर और कानूनी अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया। इस स्थिति को देखते हुए, NITES ने TCS में लेऑफ ऑडिट की मांग की है। दरअसल इस इंस्टीटूशन का कहना है कि कंपनी कर्मचारियों की सही संख्या का पब्लिकली खुलासा करे। साथ ही, महाराष्ट्र सरकार से अपील की गई है कि वह केवल कंपनी के बयानों पर भरोसा न करे। 

TCS रिपोर्ट से अलग सरकारी आंकड़े 

इन सभी शिकायतों के बाद, NITES ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को डिटेल्ड मेमोरेंडम सौंपा। इस मेमोरेंडम में पुणे और महाराष्ट्र के अन्य सेंटर्स पर हुई छंटनी का मुद्दा उठाया गया। जिसके बाद, विधानसभा के विंटर सेशन में श्रम मंत्री के बयान जारी किया। मंत्री के अनुसार, उस दौरान पुणे TCS में छंटनी से केवल 376 कर्मचारी प्रभावित हुए थे। 

TCS में लेऑफ ऑडिट जरूरी

बता दें कि यह ऑफिशियल डेटा TCS के क्वाटर्ली हेडकाउंट से बिल्कुल अलग है। कंपनी की रिपोर्ट में एक ही क्वार्टर में 11,000 से ज्यादा कर्मचारियों की कटौती दिखाई गई। इससे सवाल उठता है कि एग्जिट को कैसे क्लासिफाई और रिपोर्ट किया जाता है। NITES का कहना है कि फोर्स्ड रेजिग्नेशन और ‘साइलेंट एग्जिट’ ऑफिशियल लेऑफ में कही भी मेंशन नहीं है। ऐसे में एक्जैक्ट लेऑफ रिपोर्ट करना मुश्किल हो जाता है। 

जांच के दायरे में IT सेक्टर

इस मामले पर क्रिटिक्स का कहना है कि सरकार ने इंडिपेंडेंट ऑडिट या लेबर इंस्पेक्शन किए बिना सिर्फ कंपनी के डेटा पर भरोसा किया। NITES ने साफ कहा है कि टेक सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी भी कानून की नजर में ‘वर्कर’ ही हैं। 

NITES ने अब इस मामले को लेबर कमिश्नर के सामने उठाया। संगठन ने मांग की है कि TCS में हुई सभी कटौती की ऑडिट हो। NITES का कहना है कि ऑटोमेशन या वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर कानून को ताक पर नहीं रखा जा सकता। कंपनी का प्रोसेस ट्रांसपेरेंट होनी चाहिए। किसी भी बदलाव में कर्मचारियों के सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है।

Summary:

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कर्मचारियों की संख्या तेजी से कम हुई है। Q3 FY 26 में 11,151 और पिछले क्वार्टर में 19,000 से ज्यादा लेऑफ किए गए। TCS इसे रूटीन एट्रिशन बता रहा है। हालांकि NITES का कहना है कि कई कर्मचारियों को फोर्स्ड रेजिग्नेशन देना पड़ा। NITES ने लेबर कमिश्नर से ऑडिट की मांग की है। NITES ने लेऑफ डेटा पब्लिक करने की अपील की।


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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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