अक्सर लोग अस्पताल के लंबे-चौड़े बिल को लेकर परेशान रहते है। हालांकि अब मरीज़ों ये परेशानी दूर हो सकती है। हाल ही में भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने एक स्टैंडर्ड हॉस्पिटल बिल फॉर्मेट जारी किया है। इसका उद्देश्य बिलिंग प्रोसेस को स्पष्ट बनाना है।
नए फॉर्मेट से मरीज़ों को क्लियर जानकारी मिलेगी। मेडिकल चार्ज समझना आसान होगा। साथ ही, हॉस्पिटल खर्चों को लेकर विवाद भी कम होंगे।

स्टैंडर्ड हॉस्पिटल बिल फॉर्मेट क्यों जरूरी है?
भारत में हॉस्पिटल बिलिंग लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। अलग-अलग हॉस्पिटलों के बिल एक जैसे नहीं होते। कहीं लैंगुएज अलग होते हैं। तो कहीं फॉर्मेट। कहीं बार तो आइटम की लिस्ट ही समझ से बाहर होती है। ऐसे में खर्चों की तुलना करना और चार्ज वेरिफाई करना मुश्किल हो जाता है।
पिछले कुछ सालों से मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। प्राइवेट हेल्थकेयर पर लोगों की निर्भरता भी बढ़ी है। ऐसे में बिलिंग में क्लैरिटी बहुत आवश्यक है।
BIS फॉर्मेट के साथ बिलिंग सिस्टम में आएगा बदलाव
दरअसल स्टैंडर्ड फॉर्मेट न होने से गलतफहमियां बढ़ीं है। मरीजों के बीच हॉस्पिटल्स की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए। जिसके चलते अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें सामने आने लगीं। इसी को देखते हुए BIS ने स्टैंडर्ड बिल स्ट्रक्चर लॉन्च किया है। इस फॉर्मेट से पब्लिक और प्राइवेट अस्पतालों में बिलिंग एक जैसी हो सके। ऐसे इस सिस्टम से ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी। साथ अस्पतालों पर मरीजों का विश्वास फिर बढ़ेगा।
नए फॉर्मेट में कौन-सी बातें हैं खास?
BIS-अप्रूव्ड फॉर्मेट अस्पतालों को यह स्पष्ट करता है कि बिलिंग जानकारी कैसे प्रेजेंट की जाए।
इस फॉर्मेट के कुछ खास फीचर्स इस प्रकार हैं-
मरीज की जानकारी
नाम, उम्र, कांटेक्ट नंबर और यूनिक ID
कुल देय राशि
अंतिम देय राशि और कुल चार्जेज की समरी
टैक्स और इंश्योरेंस
टैक्स, डिस्काउंट, इंश्योरेंस क्लेम या एडजस्टमेंट।
अस्पताल की जानकारी
नाम, पता, रजिस्ट्रेशन नंबर और इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम।
ट्रीटमेंट डिटेल्स
सर्विसेज, प्रोसेस, कंसल्टेशन, मेडिसिन और इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ों की लिस्ट।
स्पष्ट चार्ज हेडिंग
रूम चार्ज, डायग्नोस्टिक्स, मेडिसिन, प्रोफेशनल फीस और अन्य सर्विस लिए अलग-अलग कैटेगरी।
इस फॉर्मेट से मरीज़ों को कैसे फायदा मिलेगा?
मरीज़ों को एक जैसा बिल लेआउट मिलेगा। यह खर्चों को समझना आसान बनाएगा। बजट बनाने में मदद मिलेगी। इंश्योरेंस क्लेम फाइल करना भी आसान होगा। जिसके बाद डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस ज्यादा स्पष्ट और व्यवस्थित होगा।
माना जा रहा है कि इस फॉर्मेट से अस्पतालों में बिलिंग से जुड़े विवाद कम होंगे। बेहतर कंप्लायंस और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से अस्पतालों को कई फायदे मिलेंगे। जैसे-
– इससे एडमिनिस्ट्रेटिव एफिसिएंसी बढ़ सकती है।
– यह कदम बढ़े हुए बिल और फिजूल चार्जिंग को रोकने में मदद करेगा।
नए बिल फॉर्मेट को लागू करने की प्रक्रिया
भारत भर के अस्पतालों से अपेक्षा की जाएगी कि वे जल्द ही नए बिलिंग फॉर्मेट को अपनाएं। यह बदलाव एक कंप्लायंस पीरियड के भीतर करना होगा।
रेगुलेटर अस्पतालों के बिल फॉर्मेट का ऑडिट कर सकते हैं। अगर ज़रूरत पड़ी, तो बदलाव करने के लिए कहा जा सकता है।अस्पताल के एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही, बिलिंग सॉफ़्टवेयर भी अपडेट्स होंगे।
बेहतर हेल्थकेयर सिस्टम की ओर एक कदम
हेल्थकेयर सिस्टम में बिलिंग को पारदर्शी बनाने की दिशा में यह अहम कदम है। इस बदलाव से पेशेंट्स का भरोसा बढ़ेगा। मरीज और डॉक्टर दोनों को क्लैरिटी मिलेगी। इलाज और खर्च को समझना आसान होगा। बिलिंग से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।
Summary:
भारत में हेल्थकेयर सिस्टम में बड़ा बदलाव हो रहा है। BIS ने नया स्टैंडर्ड हॉस्पिटल बिल फॉर्मेट जारी किया है। इससे मरीज़ों को स्पष्ट और एक जैसी जानकारी मिलेगी। खर्चो को समझना और तुलना करना आसान होगा। बिलिंग कंट्रोवर्सी कम होंगे और इंश्योरेंस क्लेम भी सरल बनेंगे। यह कदम मरीज़ों के भरोसा मजबूत करेगा। जिससे एक स्पष्ट बिलिंग सिस्टम सुनिश्चित होगा।
