NASA एक ऐतिहासिक स्पेसफ्लाइट की तैयारी कर रहा है। 50 साल बाद इंसान फिर से चांद के करीब जाएगा। इंटरनेशनल स्पेस अपडेट्स के अनुसार इसकी लॉन्चिंग 6 मार्च, 2026 को हो सकती है। यह आर्टेमिस I (Artemis I) मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मिशन क्रू के साथ चांद के चारों ओर फ्लाईअराउंड करेगा।

‘आर्टेमिस II’ क्यों है इतना खास?
NASA के इस नए आर्टेमिस प्रोग्राम को एक बहुत ही महत्वपूर्ण मिशन माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इंसानों को एक बार फिर चांद की सतह पर उतारना है। इस मिशन में पहली बार SLS रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट इंसानों के साथ उड़ान भरेंगे। इस प्रोग्राम में चार एस्ट्रोनॉट्स जाएंगे। वे करीब 10 दिन अंतरिक्ष में रहेंगे। चांद के चारों ओर घूमेंगे। फिर सुरक्षित धरती पर लौट आएंगे।
‘Artemis II’ क्रू इतिहास रचने के लिए तैयार
Artemis II मिशन के लिए चार सदस्यीय टीम चुनी गई है। NASA के एस्ट्रोनॉट रीड वाइज़मैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच इस मिशन का हिस्सा हैं। इसके अलावा, कनाडाई स्पेस एजेंसी के जेरेमी हैनसेन भी टीम में शामिल है। हैनसेन पहले नॉन अमेरिकी सिटीजन होंगे। जो ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ से आगे चांद की दिशा में ट्रेवल करेंगे।
हालांकि यह मिशन अपोलो प्रोग्राम से अलग होगा। जहां अपोलो मिशन का लक्ष्य चांद पर कदम रखना था। वही ‘Artemis II’ चांद के चारों ओर चक्कर लगाएगा। यह एक बहुत ही अहम टेस्ट होगा। जिससे इंसानों के साथ डीप स्पेस सिस्टम को परखा जाएगा।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है यह मिशन?
आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन कई कारणों से अहम है। यह 1972 के बाद लो अर्थ ऑर्बिट से आगे पहली क्रू वाली स्पेसफ़्लाइट होगी। बता दें कि करीब 50 साल बाद इंसान फिर चांद की दिशा में जाएंगे। मिशन के समय डीप स्पेस माहौल में स्पेसक्राफ्ट सिस्टम की भी जांच की जाएगी। इसमें लाइफ़ सपोर्ट, नेविगेशन और कम्युनिकेशन जैसे जरूरी सिस्टम शामिल हैं।
NASA का सबसे शक्तिशाली रॉकेट रचेगा नया इतिहास
NASA का यह स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट विशेष रूप से डीप स्पेस मिशनों के लिए तैयार किए गए हैं। यह पावरफ़ुल लॉन्च सिस्टम और एडवांस्ड क्रू कैप्सूल हैं। जिन्हें लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए डिजाइन किया गया है। जिससे एस्ट्रोनॉट्स सुरक्षित रूप से स्पेस तक पहुंचे और वापस लौट सकें।
मिशन से पहले कड़ी सुरक्षा जांच
बताते चलें कि लॉन्च से ‘Artemis II’ को भी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। रिहर्सल टेस्ट के दौरान हाइड्रोजन लीक होने से लॉन्च में देरी हुई। जिसके दोबारा परीक्षण करने की ज़रूरत पड़ी। ऐसे में ‘NASA’ 6 मार्च की लॉन्च विंडो से पहले फ़ाइनल फ़्लाइट रेडीनेस रिव्यू कर रहा है। इतना नहीं नहीं, क्रू क्वारंटाइन और प्री-फ़्लाइट प्रोसीजर भी पूरे किए जा रहे हैं। इन सभी स्टेप्स का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिशन पूरी तरह सुरक्षित रहे।
Artemis III और डीप स्पेस की ओर अगला कदम
अगर आर्टेमिस II सफल होता है, तो यह NASA के डीप स्पेस मिशन की योजना को टेस्ट करेगा। यह ‘Artemis III’ के लिए स्टेज भी तैयार करेगा। ‘Artemis III’ के जरिए एस्ट्रोनॉट्स पहली बार चांद की सतह पर कदम रखेगा। इन सभी कैंपेन का लक्ष्य चांद को एक ‘लॉन्चिंग पैड’ के रूप में इस्तेमाल करना है।
Summary:
‘NASA’ अब 50 साल बाद इंसानों को फिर चांद की ओर भेजने की तैयारी में है। ‘Artemis II’ की लॉन्चिंग 6 मार्च 2026 को हो सकती है। चार एस्ट्रोनॉट्स चांद की कक्षा में फ्लाईअराउंड करेंगे। वे करीब 10 दिन अंतरिक्ष में रहेंगे। इस दौरान SLS रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट की जांच होगी। मिशन डीप स्पेस सिस्टमकी टेस्टिंग करेगा। मिशन सफल होने पर आगे के अभियान शुरू होंगे।
