मुंबई के पॉश एरिया में रहने वाले लोग अक्सर भारी मेंटेनेंस बिलों से परेशान रहते हैं। हालांकि साउथ मुंबई में एक रेजिडेंशियल सोसाइटी ने सबका ध्यान खींचा। यहां रहने वाले मेंटेनेंस फीस नहीं देते। उल्टा, उन्हें पैसे मिलते हैं। ‘जॉली मेकर’ नाम की यह सोसाइटी कफ परेड में स्थित है। यह शहर के सबसे महंगे इलाकों में से एक है। इसका अनोखा फाइनेंशियल मॉडल ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गया है।

मुंबई का अनोखा रियल एस्टेट ट्रेंड
सोशल मीडिया पर ‘जॉली मेकर’ सोसाइटी को लेकर काफी चर्चा हो रही है। इस सोसाइटी में फ्लैटओनर्स को हर साल करीब 2.5 लाख रुपये मिलते हैं। दरअसल यह मामला तब चर्चा में आया जब रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंटेंट बनाने वाले विशाल भार्गव ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया।
भार्गव के मुताबिक, यहां घर के मालिकों से मेंटेनेंस फीस नहीं ली जाती। इसके बजाय, सोसायटी खुद उन्हें पेमेंट करती है।
भार्गव ने बताया- ‘मुंबई में इस बिल्डिंग में रहने के लिए घर के मालिकों को 2.5 लाख रुपये मिलते हैं। बिल्डिंग सोसाइटी खुद उन्हें पेमेंट करती है। उन्होंने आगे कहा, ‘यह सोसाइटी इतनी समृद्ध है कि मालिकों से मेंटेनेंस फीस नहीं ली जाती। इसके बजाय, हर ओनर को डिविडेंड दिया जाता है।’
किराए के पैसों से चल रहा है मेंटेनेंस
इस बीच सोचने वाली बात यह है कि ‘जॉली मेकर’ सोसाइटी के पास पैसे आते कहां से हैं? विशाल भार्गव ने इस बारे में खुलकर बताया। उन्होंने कहा कि इस अनोखे फाइनेंशियल स्ट्रक्चर की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। उस समय अपार्टमेंट बेचते हुए बिल्डर ने खरीदारों को एक खास ऑफर दिया था।
इस ऑफर के तहत खरीदारों को नरीमन पॉइंट की एक दूसरी कमर्शियल बिल्डिंग में 40% एक्स्ट्रा निवेश करने का मौका मिला। आज उस प्रॉपर्टी से हर महीने 50 लाख रुपए का रेंट आता है। इसी रेंटल इनकम का इस्तेमाल सोसाइटी के मेंटेनेंस और मालिकों को डिविडेंड देने में किया जाता है।
पेटीएम फाउंडर ने शेयर किया Video
दरअसल इस वीडियो को और रफ्तार तब मिली जब Paytm के फाउंडर Vijay Shekhar Sharma ने इसे X पर रीशेयर किया। उन्होंने लिखा, ‘आपको इस मैथ पर यकीन नहीं होगा! लेकिन यह सच है।
इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर भर-भर के कमैंट्स किए। कुछ लोगों ने इस मॉडल की तारीफ की। कुछ ने शक जताया। एक यूज़र ने लिखा, “अच्छा पुराने ज़माने का कैपिटलिज़्म, इसे मार्केट करो और ब्रांड बनाओ” बाकी काम लोग खुद कर लेंगे।” दूसरे ने मज़ाक में पूछा, “हॉन्टेड तो नहीं?” वहीं कुछ ने सीधे कहा, “मैथ, मैथिंग नहीं है।”
सोशल मीडिया दावों में कितनी सच्चाई?
जहां एक ओर सोशल मीडिया पर ये दावे तेज़ी से फैल रहे हैं। वही, Moneycontrol.com ने साफ किया कि वह स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं कर सका। मुंबई के इस कंक्रीट के जंगल में यह इमारत एक अनोखी मिसाल है। यह याद दिलाती है कि कभी-कभी घर की दीवारें भी आपके लिए कमाई कर सकती हैं।
Summary:
मुंबई के पॉश कफ परेड में स्थित ‘जॉली मेकर’ सोसाइटी चर्चा में है। यहां फ्लैट मालिक मेंटेनेंस फीस नहीं देते। उल्टा, उन्हें हर साल करीब 2.5 लाख रुपये मिलते हैं। दावा है कि यह रकम पुरानी कमर्शियल प्रॉपर्टी से मिलने वाले किराए से आती है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
