1 अप्रैल से महंगी होगी दवाएं! Paracetamol समेत किन-किन मेडिसिन के दाम बढ़ेंगे? यहां जानें


Bhawna Mishra

Bhawna Mishra

Mar 29, 2026


देश में 1 अप्रैल, 2026 से जरूरी दवाएं महंगी होने जा रही हैं। इसमें पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स और एंटी-इन्फेक्टिव जैसी महत्वपूर्ण मेडिसिन शामिल हैं। सरकार ने इनकी प्राइस में मामूली बढ़ोतरी का फैसला लिया है। यह वृद्धि ज्यादा नहीं है। इसका असर खासतौर पर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं पर पड़ सकता है।

जानिए इसके मुख्य कारण-

1. 0.6% की मामूली वृद्धि

सरकार ने जरूरी दवाओं के दाम बढ़ाने को लेकर मंजूरी दे दी है। जिसके चलते अब मेडिसिन की प्राइस में लगभग 0.6% से 0.65% तक बढ़ जाएगी। यह बदलाव केवल उन दवाओं पर लागू होगा, जो ‘नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स’ (NLEM) में शामिल हैं। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी पूरी तरह नियंत्रित है। इसमें मनमानी की गुंजाइश नहीं है। 

2. इन्फ्लेशन के अनुसार तय होगी तय कीमतें 

दवाओं के दामों में यह बदलाव होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) पर आधारित है। साल 2024 के मुकाबले 2025 में, होलसेल इन्फ्लेशन रेट में 0.65% की वृद्धि दर्ज की गई थी। सरकारी पॉलिसी के तहत दवाइयों की प्राइस हर साल इसी इंडेक्स के हिसाब से बदलती है। इसका उद्देश्य दवाओं की कीमत सही रखना और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

3. 1,000 से ज्यादा दवाओं पर असर

इस बढ़ोतरी का असर 1,000 से ज्यादा ज़रूरी दवाओं पर होगा। ये दवाएं बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती हैं। इसका मतलब है कि बदलाव का असर लगभग हर घर तक पहुंचेगा। इन दवाओं में मुख्य रूप से शामिल है-

• पैरासिटामोल (दर्द से राहत के लिए)

• एज़िथ्रोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स

• संक्रमण-रोधी दवाएं और विटामिन

• एनीमिया और अन्य आम बीमारियों की दवाएं

4. कंपनियों को कीमत बढ़ाने की छूट

फार्मा कंपनियों अब WPI के हिसाब से खुद कीमतें बढ़ा सकती हैं। इसके लिए उन्हें हर बार सरकार से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती। यह सुविधा उन्हें ‘ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर’ (DPCO) के नियमों के तहत मिलती है। हालांकि, कंपनियां मनमाने दाम नहीं वसूल सकती। इसके लिए पहले से एक लिमिट तय की गई है। 

5. दवाओं की लागत में भारी उछाल

कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी फार्मा कंपनियों की मुश्किलें बनी हुई हैं। दवाओं का कच्चा माल अब 35% तक महंगा हो गया है। पैकिंग का खर्च भी करीब 40% तक बढ़ चुका है। पैरासिटामोल जैसी दवाओं की लागत में 25% से ज्यादा की वृद्धि आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मामूली बढ़ोतरी खर्च के लिए काफी नहीं है।

यूज़र्स के लिए राहत की खबर

वैसे तो यह बढ़ोतरी काफी मामूली है। इसलिए ज्यादातर लोगों को ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा। हालांकि, लंबे समय तक चलने वाले इलाज में खर्च धीरे-धीरे बढ़ सकता है। लेकिन इसके बावजूद, आम जनता के लिए जरूरी दवाएं किफायती बनी रहेंगी।

कीमतों पर सरकार की कड़ी नज़र

दवाओं की कीमतों में यह सालाना बदलाव एक बैलेंस बनाने की कोशिश है। इसका उद्देश्य दवाओं को सस्ता बनाए रखना है। ताकि आम लोगों पर बोझ न बढ़े। साथ ही कंपनियों को बढ़ती लागत से राहत मिले। इससे निश्चित तौर पर जनता और कंपनी दोनों को फायदा होगा।

60-Words Summary-

1 अप्रैल 2026 से देश में जरूरी दवाएं थोड़ी महंगी होंगी। कीमतों में करीब 0.6% की बढ़ोतरी होगी। यह बदलाव NLEM में शामिल दवाओं पर लागू होगा। इस लिस्ट में पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स और विटामिन जैसी दवाइयां शामिल हैं। इसका असर 1000 से ज्यादा दवाओं पर पड़ेगा। सरकार कीमतों को कंट्रोल में रखेगी। ताकि बोझ ज्यादा न बढ़े। लंबे इलाज में खर्च बढ़ सकता है। आने वाले समय में दवाएं किफायती रहेंगी।


Bhawna Mishra
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She is a seasoned writer with a passion for Storytelling and a keen interest in diverse topics. With 2.5 years of experience, she excels in writing about Tech, Sports, Entertainment, and various Niche topics. Bhawna holds a Postgraduate Degree in Journalism and Mass Communication from St Wilfred’s College of Jaipur.

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