नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है। लेकिन उससे पहले ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां चिंतित हैं। उनका कहना है कि एयरपोर्ट (Navi Mumbai Airport) पर मोबाइल नेटवर्क लगाने में रुकावट डाली जा रही है। साथ ही, यह भी आरोप है कि सिर्फ एक सर्विस प्रोवाइडर को फेवर किया जा रहा है।
हालांकि टेलीकॉम सेक्टर ने इस कदम को गलत बताया है। कंपनियों का मानना है कि इससे मोनोपॉली बनेगी। फेयर कॉम्पिटिशन कमजोर होगा। अंत में इसका असर पैसेंजर्स पर पड़ेगा।

टेलीकॉम ऑपरेटर्स क्यों जताई नाराजगी?
दरअसल मोबाइल नेटवर्क व्यवस्था पर टेलीकॉम कंपनियों ने नाराजगी जताई हैं। कई टेलीकॉम कंपनियों ने एयरपोर्ट मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें देश के सबसे बड़े मोबाइल ऑपरेटर्स भी शामिल हैं। कंपनियों का कहना है कि जरूरी इक्विपमेंट लगाने में अड़चनें डाली जा रही हैं। यहां तक कि बेस स्टेशन और एंटीना जैसे सिस्टम लगाने की इजाजत नहीं मिल रही।
ऑपरेटर्स का कहना है कि अगर बेस स्टेशन, एंटीना और नेटवर्क इक्विपमेंट को एक्सेस नहीं मिलेगा। तो वे अच्छा मोबाइल नेटवर्क नहीं दे पाएंगे। इसका असर टर्मिनल, लाउंज, पार्किंग एरिया और एयरपोर्ट के आसपास दिखेगा।
एयरपोर्ट पर क्यों जरूरी है मोबाइल नेटवर्क?
आज के लोग यात्रा के दौरान नेटवर्क को बहुत महत्व देते हैं। फ्लाइट अपडेट चेक करना, मैसेज भेजना, वर्क ईमेल देखना, मैप इस्तेमाल करना या राइड बुक करना। इन सबके लिए एक अच्छा नेटवर्क जरूरी है। खासकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अच्छा मोबाइल कनेक्शन हर किसी के लिए जरूरी है।
खराब मोबाइल नेटवर्क के चलते ये समस्याएं हो सकती हैं-
• इमरजेंसी में तुरंत संपर्क नहीं कर पाना
• डिजिटल बोर्डिंग पास इस्तेमाल करने में परेशानी
• राइड बुकिंग या अन्य डिजिटल सर्विस में परेशानी
• फ्लाइट नोटिफिकेशन मिस हो जाने पर यात्रा में रुकावट
टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि एयरपोर्ट पर सभी लाइसेंस्ड ऑपरेटरों को समान अवसर मिलना चाहिए। ताकि पैसेंजर्स अपने नेटवर्क प्रोवाइडर की चिंता किए बिना आसानी से कनेक्टिविटी का फायदा उठा सकें।
एयरपोर्ट मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया
एयरपोर्ट मैनेजमेंट कहता है कि नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर लगाते समय सिक्योरिटी और ऑपरेशन दोनों जरूरी हैं। खासतौर पर रिस्ट्रिक्टेड जोन में जहां जगह कम है। ऐसे में नियमों के कारण कई प्रोवाइडर्स के साथ काम करना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल अथॉरिटीज़ बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि कोई भी डिप्लॉयमेंट, सिक्योरिटी रूल्स और कोऑर्डिनेशन के बिना नहीं हो सकता।
पैसेंजर्स और कंपनियों पर असर
अगर यह विवाद सुलझा नहीं, तो पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर कमजोर नेटवर्क का सामना करना पड़ सकता है। खासकर भीड़भाड़ या पीक आवर्स में। टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि लिमिटेड एक्सेस से सर्विस क्वालिटी प्रभावित होगी। कस्टमर सटिस्फैक्शन भी गिर सकती है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह पॉलिसी भविष्य में अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए उदाहरण बन सकती है।
Summary:
नवी मुंबई एयरपोर्ट (Navi Mumbai International Airport) पर मोबाइल नेटवर्क को लेकर विवाद छिड़ गया है। जियो और एयरटेल ने अडानी ग्रुप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने से रोका जा रहा है। वहां केवल एक कंपनी को फायदा दिया जा रहा है। दूसरी तरफ, एयरपोर्ट मैनेजमेंट इसे सुरक्षा का मुद्दा बता रहा है। नतीजतन, पैसेंजर्स को खराब सिग्नल और महंगे टैरिफ का सामना करना होगा।
