बेंगलुरु से फ्रॉड का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक अनजान फोन कॉल 73 साल के बुजुर्ग के लिए दो दिन का बुरा सपना बन गया। साइबर ठगों ने झांसा देकर बुजुर्ग को 50 लाख रुपये का चूना लगा दिया। 8 मार्च को दर्ज FIR के मुताबिक, यह सिलसिला 5 मार्च की दोपहर को शुरू हुआ। डोम्लुर निवासी बुजुर्ग के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। इसके बाद जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया।
साइबर अपराधियों ने फोन पर बुजुर्ग को डराते हुए एक झूठा दावा किया। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग का मोबाइल नंबर मनी-लॉन्ड्रिंग के किसी बड़े केस में फंसा है। इसके तुरंत बाद, ठगों ने व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया। उन्हें बताया कि उन्हें ‘डिजिटली अरेस्ट’ कर लिया गया है।

डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे बुज़ुर्ग
साइबर अपराधियों ने फोन पर बुजुर्ग को डराते हुए एक झूठा दावा किया। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग का मोबाइल नंबर मनी-लॉन्ड्रिंग के किसी बड़े केस में फंसे हुए है। इसके तुरंत बाद, उन्होंने व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि उन्हें ‘डिजिटली अरेस्ट’ कर लिया गया है। बुजुर्ग को धमकाया गया कि अब उन्हें एक खास जांच से गुजरना होगा। इतना ही नहीं, उन्हें डराया गया कि अब उन्हें सभी निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।
72 घंटे का डिजिटल टॉर्चर
पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए उसे 72 घंटे तक किसी से भी बात न करने की सख्त हिदायत दी। यहां तक कि उन्हें लगातार व्हाट्सऐप कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया गया। आरोपियों ने यह भी दावा किया कि नवी मुंबई में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी उस पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पीड़ित के घर के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
दवा के बहाने भरोसा जीतने की साजिश
7 मार्च की सुबह करीब 8:30 बजे बुजुर्ग ने अपनी बीमारी का हवाला दिया। उन्होंने ठगों को बताया कि वह हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। इसी कारण वे लंबी बात नहीं कर सकते। तब फ्रॉडस्टर्स ने तुरंत घर पर दवा भेजने का नाटक किया। कुछ ही मिनटों में एक अनजान शख्स वाकई उनके दरवाजे पर दवा लेकर आ गया। इस सटीक टाइमिंग ने बुजुर्ग के मन में सिक्योरिटी एजेंसी का डर और पक्का कर दिया।
नकली आदेश दिखाकर मांगे 50 लाख
उसी सुबह करीब 10:30 बजे आरोपियों ने एक नया पैंतरा चला। उन्होंने बुजुर्ग को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए एक फर्जी ‘अदालती कार्यवाही’ में शामिल किया। इस दौरान ठगों ने रिहा होने का एक जाली डॉक्यूमेंट भी दिखाया। जिसके बाद बुजुर्ग को तुरंत एक बैंक अकाउंट में 50 लाख रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया।
धमकी के दबाव में पीड़ित ने गंवाई रकम
डर के चलते पीड़ित ने आरोपियों की बात मान ली। उसने ‘PAYNCARE TECHNOLOGIE’ नाम के खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। कुछ समय बाद उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। यह मामला बेंगलुरु ईस्ट CEN पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। इसमें IT एक्ट की धारा 66(C) और 66(D) के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 और 318(4) लगाई गई।
60-Words Summary:
बेंगलुरु से साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 73 साल के बुजुर्ग से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 50 लाख रुपये ठगे गए। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। उन्हें 72 घंटे तक दबाव में रखा गया। नकली जांच और फर्जी दस्तावेज दिखाए गए। डर के चलते पीड़ित ने पैसे ट्रांसफर कर दिए। बाद में मामला पुलिस में दर्ज कराया गया।
