भारत सरकार ने मोटर वाहन नियमों (motor vehicle rules) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सीधा असर पुराने वाहनों पर पड़ेगा। अब 10 साल या उससे अधिक पुराने वाहन ‘पुराने माने जाएंगे। इसके साथ ही फिटनेस सर्टिफिकेशन की फीस में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। नए नियमों के तहत व्हीकल ओनर्स को फिटनेस टेस्ट के लिए पहले से करीब दस गुना ज्यादा फीस देनी होगी होगा।

आइए समझते हैं क्या हैं रोड सेफ्टी से जुड़े नए नियम-
फिटनेस टेस्ट के नियम अब और सख्त
बता दें कि अब तक कई नियमों में 15 साल पुरानी गाड़ियों को ही ‘पुराना’ माना जाता था। हालांकि नए नियमों के तहत, यह लिमिट घटाकर 10 साल कर दी गई है। इसके बाद ज्यादा वाहन इंस्पेक्शन के दायरे में आएंगे।
इसका असर हर तरह की गाड़ियों पर होगा। इस लिस्ट में प्राइवेट कार, कमर्शियल और कार्गो ट्रांसपोर्टेशन व्हीकल भी शामिल है। अब इन गाड़ियों को शुरू के कुछ सालों में ही फिटनेस टेस्ट कराना होगा। 10 साल पूरे होने के बाद इंस्पेक्शन की प्रक्रिया और भी सख्त होगी।
फिटनेस सर्टिफिकेशन चार्ज में इजाफा
इन अपडेटेड नियमों में फिटनेस सर्टिफिकेशन फीस में भारी बढ़ोतरी की गई है। यह बदलाव सबसे अहम माना जा रहा है। अब वाहन मालिकों को फिटनेस टेस्ट के लिए पहले से कहीं ज्यादा चार्जेस का पेमेंट करना होगा। एक ही सर्टिफिकेशन के लिए दस गुना तक फीस बढ़ सकती है।
उदाहरण के तौर पर, 12 साल पुराने वाहन के लिए एक टेस्ट पहले काफी सस्ता होता था। हालांकि अब उसकी कॉस्ट व्हीकल कैटेगिरी और ऐज पर निर्भर करती है। कई मामलों में फीस कई गुना बढ़ सकती है।
एनवायरनमेंट और सेफ्टी को प्राथमिकता
इस बदलाव का उद्देश्य स्पष्ट है। ओनर्स को बेहतर मैंटेनेंस के लिए प्रेरित करना। नए स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के लिए जरूरी बदलाव करवाना। साथ ही, ज्यादा सेफ और एनवायरनमेंट फ्रेंडली व्हीकल को अपनाने को बढ़ावा देना।
सरकार ने अपडेट किए नियम
सरकार ने मोटर वाहन नियमों के कुछ खास पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया है। जैसे-
– बेहतर सड़क सुरक्षा
पुराने वाहनों में मैकेनिकल फेलियर होने की संभावना ज्यादा होती है। इससे एक्सीडेंट बढ़ सकती हैं। ऐसे में फिटनेस टेस्ट से इन समस्याओं का पहले से पता चल जाएगा।
– पॉल्युशन से राहत
10 साल या उससे पुराने वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। रेगुलर टेस्टिंग से नियमों का सही तरीके से पालन किया जाएगा। इससे पर्यावरण को होने वाला नुकसान कम होगा।
– फ्लीट रिन्यूअल को बढ़ावा
पुराने वाहनों की मेंटेनेंस अब महंगा पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का मानना है कि वाहन मालिक नए, फ्यूल-एफिशिएंट और सुरक्षित मॉडल में अपग्रेड करें।
नए नियमों से पुरानी गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा?
नए नियमों से कई तरह के वाहन पर असर पड़ेगा। जिनमें शामिल हैं-
• टैक्सी, ट्रक और बसों के कमर्शियल ऑपरेटर।
• फ्लीट मालिक, जो बिज़नेस के लिए दर्जनों गाड़ियां रखते हैं।
• प्राइवेट कार ओनर्स, जिनकी गाड़ियों को 10 साल से ज़्यादा हो गए हैं।
जिनके पास पुरानी गाड़ियां हैं, उनके लिए नए फिटनेस नियम चुनौती बन सकते हैं। इससे सालाना खर्च बढ़ेगा। बार-बार फिटनेस टेस्ट करवाना होगा। कुछ मामलों में गाड़ी अपग्रेड करना जरूरी होगा।
नए नियमों के फायदे और चुनौतियां
यह सख्त नियम और बढ़ी हुई फीस शुरुआत में कुछ लोगों को गलत लग सकते हैं। हालांकि इनसे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी। दूसरी ओर, प्राइवेट व्हीकल ओनर और छोटे ऑपरेटर इन नियमों से परेशान हो सकते हैं। टेस्टिंग की कीमत उनके लिए महंगी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, गाड़ी अपग्रेड करना महंगा साबित हो सकता है।
Summary:
भारत में 10 साल या उससे पुराने वाहन अब पुराने माने जाएंगे। इनके लिए फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। फिटनेस फीस में दस गुना तक बढ़ोतरी संभव है। इस बदलाव का उद्देश्य स्पष्ट है। सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना। प्रदूषण पर नियंत्रण पाना। लेकिन फायदे के साथ कुछ मुश्किलें भी हैं। पुरानी गाड़ियों से खर्च बढ़ेगा। बार-बार फिटनेस टेस्ट कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
